Wayanad landslide : विनाश और बर्बादी का दूसरा नाम प्रलय

Wayanad landslide: Another name for destruction and devastation is cataclysm

Wayanad landslide: Another name for destruction and devastation is cataclysm.
Wayanad landslide: Another name for destruction and devastation is cataclysm.

Wayanad landslide : वायनाड पहाड़ी जिला है और पश्चिमी घाट का हिस्सा जहां 2100 मीटर तक ऊंचे पहाड़ हैं। मानसून में ये पहाड़ भू-स्खलन के लिए बेहद संवेदनशील हैं। जहां यह त्रासद घटना हुई है, वहां दो सप्ताह से बारिश हो रही थी, लिहाजा पहाड़ की मिट्टी गीली और ढीली हो चुकी थी। इसलिए एक ही रात में लगातार 3 भू-स्खलन आए।

पहाड़ दरक कर गिरने लगे, सडक़ और पुल ताश के पत्तों की तरह बिखरने और ढहने लगे। जलवायु-परिवर्तन ने भी बारिश की स्थिति और भू-स्खलन की तीव्रता को बढ़ाया है। अब केरल के वायनाड जिले में लगातार तीन भू-स्खलन आए और फिर सैलाब आया, गांव के गांव दफन हो गए, 400 से अधिक घर देखते ही देखते ‘मलबा’ हो गए, करीब 200 मौतें हो चुकी हैं और इतने ही लोग लापता बताए जा रहे हैं, यह प्रलय नहीं है, तो और क्या है? इस हादसे, संकट या घटना पर राजनीति नहीं होनी चाहिए।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में बयान दिया है कि उन्होंने 23, 24, 25 जुलाई को केरल सरकार को चेतावनी भेजी थी। केरल के मुख्यमंत्री विजयन ने ऐसी चेतावनियों से इंकार किया है। उनका कहना है कि रेड अलर्ट तब जारी किया गया, जब सैलाब आ चुका था।

देश के उत्तराखंड राज्य में टिहरी बांध (Tehri Dam in Uttarakhand state)  में ढलानों की कटाई के बाद बेहतर सुरक्षा उपाय किए गए हैं। ताइवान ने पहाड़ पर दबावमापी यंत्र लगाकर एक भिन्न प्रयोग किया है। इससे यथासमय पता चल जाता है कि पहाड़ पर कितना दबाव है और वह लोगों को पहाड़ के दरकने को लेकर आगाह कर देता है।

भारत में हर सरकार और नागरिक विकास चाहते हैं। उसके लिए जो निर्माण-कार्य किए जाते हैं, वे बेलगाम और अनियोजित हैं। खनन तक धड़ल्ले से कराया जाता है। 2013 में केदारनाथ धाम में जो सैलाब आया और तबाही हुई अथवा उत्तरकाशी में भूकंप के बाद जो बाढ़ आई, हमने उन्हें ही प्रलय माना।

Editorial : ‘बेटी पढ़ाओ, खूब खेलाओ’

2018 के मानसून में भी खूब बारिश हुई थी, तब करीब 400 लोगों की जान चली गई थी। उसके बाद केरल में भू-स्खलन वाला क्षेत्र बढ़ गया है। केरल में सेना और एनडीआरएफ के जवान हमें ‘देवदूत’ लगे, जिन्होंने मलबे में से निकाल कर असंख्य जिंदगियां बचाईं। हालांकि केरल की भौगोलिक स्थिति परंपरागत पहाड़ों से भिन्न है, लेकिन देश भर के 80-85 फीसदी भू-स्खलन केरल में ही आते हैं।

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