प्रेम ,विश्वास और समर्पण का पर्व -करवा चौथ

डॉ. शम्भू पंवार। भारतीय संस्कृति में करवा चौथ का त्योहार  सुहागिन स्त्रियों के जीवन में विशेष अहमियत रखता है।अखण्ड सौभाग्य का प्रतीक यह पर्व पति-पत्नी का एक दूसरे के प्रति प्रेम,विश्वास  और समर्पण के रिश्तों को सुद्रढ़  बनाता है।जो एक सुखद अहसास की अनुभूति कराता है।
 कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी  को मुख्यतः उतरी भारत में बड़े उत्साह और उमंग से यह त्योहार मनाया जाता है।पौराणिक मान्यताओं के अनुसार करवा चौथ का व्रत सुहागिन महिलाएं अपने पति की दीर्घायु के लिए बिना जल ग्रहण किए, बड़ी आस्था विश्वास के साथ रखती है।सुहागिन महिलाएं सुबह स्नान करके सूर्योदय से चंद्रोदय तक पूरे दिन निर्जला उपवास रखती है। रात्रि में चंद्रोदय पर अर्क देकर व पति का चेहरा देखकर उपवास  खोलती है।  बदलते परिवेश में आज भी भारतीय संस्कृति की रुचि रखने वाली महिलाएं  देश में हो या विदेश में पौराणिक परंपराओं और रीति-रिवाजों को निभाती हैं। करवा चौथ का व्रत विदेश में भी रह रही भारतीय महिलाएं श्रद्धा और विस्वास से रखती है ।इस संदर्भ में अंतरराष्ट्रीय लेखक,पत्रकार डॉ. शम्भू पंवार ने देश -विदेश की प्रबुद्ध महिलाओ से परिचर्चा की , प्रस्तुत है उनके विचार।
*प्रेम का प्रतीक करवा चौथ -गीतांजलि*
प्रसिद्ध साहित्यकार एवं समाज सेविका गीतांजलि “गीत” (नई दिल्ली) का कहना है की हिन्दू धर्म में अनगिनत त्योहार है और हर त्योहार का अपना महत्व है। इनमें ‘करवा चौथ’ का त्योहार सुहागिन स्त्रियों के लिए विशेष महत्व रखता है।
यह पर्व पति-पत्नी के अटूट प्रेम के बंधन को दर्शाता है। करवा चौथ पर सुहागिन महिलाएं 
अपने पति की लंबी आयु और स्वस्थ जीवन की मंगल कामना के लिए निर्जला व्रत रखती है। पौराणिक मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से मां पार्वती से अखंड सौभाग्यशाली रहने का वरदान मिलता है।इतिहास गवाह है कि एक पतिव्रता स्त्री में इतनी शक्ति है कि वो यमराज से भी अपने पति के प्राणों को लौटा कर  ला सकती है। पति -पत्नी के अटूट विश्वास के प्रतीक करवा चौथ की अखंडता युगों से कायम है और युगों तक कायम रहेगी।
* *करवा चौथ मेरी प्रेम अभिव्यक्ति का त्योहार -डॉ. भावना शर्मा**
शिक्षाविद डॉ. भावना शर्मा,झुन्झुनू का कहना है कि करवा चौथ प्रेम भरी भावनाओ का एक अद्भुत त्योहार है।यह मेरे
जीवन में सबसे महत्त्वपूर्ण व्यक्ति के होने की ख़ुशी को मनाने का तरीका है। मेरे भूले हुए गहने साल में एक बार बाहर आते हैं। मंगलसूत्र , गर्व और निष्ठा से पहना जाता है। मेरे जीवन में मेहँदी , सिन्दूर ,चूड़ियां उनके आने से है तो यह सब मेरे लिए अमूल्य है। यह सब हमारे भव्य संस्कारों और संस्कृति का हिस्सा हैं। शास्त्र दुल्हन के लिए सोलह श्रंगार की बात करते हैं। इस दिन सोलह श्रंगार कर के फिर से मै दुल्हन बन जाऊ, उनकों कहुँ कि चांद ही मेरे प्रेम का साक्षी है। मै वेलेंटाइन डे को नहीं जान पाती। पुराना भोलापन ओढ़ लेने दो, पाटे पर सखियों के साथ करवा चौथ की कहानी सुनने दो। तर्क पे विश्वास को जीत जाने दो। कहीं न कहीं किसी चमत्कार की गुंजाईश हमेशा रहती है। वैसे भी तर्क के साथ दिव्य चमत्कार की आशा किसी को नुकसान नहीं पहुंचाती। पर व्रत केवल मै ही करूंगी क्योंकि आज का दिन तो बस मेरा दिन है और सिर्फ मुझे ही वो लाड़ प्यार करे । अगर आप भूखे रह गए तो मै अपनी आराध्या चौथ माता मे मन कैसे लगाउंगी। पूरे दिन आपको भूखे देखकर मन व्यग्र रह जाएगा। नही… व्रत केवल मै ही करूंगी।
असल मे यही एक रात है अध्यात्म की, जब आपकी प्रीत ईश्वर के समकक्ष होती है और चांद गवाह होता है। चाँद सी सुन्दर की उपमा का इंतजार है मुझे।
 *पति -पत्नी के रिश्ते को सरस बनाता है-दीप शिखा*
ख्यातिनाम कवयित्री,साहित्यकार दीप शिखा श्रीवास्तव (गुरुग्राम) कहती है भारतीय परंपरा के अनुसार अखण्ड सुहाग तथा अपने पति के स्वास्थ्य व सौभाग्य की कामना से किया जाना वाला  करवाचौथ का व्रत सुहागिन स्त्रियों के लिए विशेष महत्त्वपूर्ण स्थान रखता है।
इस दिन विवाहित स्त्रियाँ निर्जला व्रत रखती हैं तथा सुंदर वस्त्राभूषण पहन कर सोलह श्रृंगार करती हैं गणेश-गौरी एवं करवा माता की पूजा करने के उपरांत चंद्रमा की पूजा कर उन्हें अर्घ्य देती हैं।
करवाचौथ ना केवल पति की दीर्घायु के लिए रखा जाता है बल्कि यह व्रत पति-पत्नी के रिश्तों को सरस बनाता है…उनके दाम्पत्य जीवन को सुखमय बनाने के साथ-साथ नवीनता भी प्रदान करता है।
प्यार और विश्वास का प्रतीक करवाचौथ परिवार की नींव को और भी सुदृढ़ बनाने वाला त्योहार व पर्व है।

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