Editorial : युद्धविराम का खेल

Editorial: Game of ceasefire

Editorial: Game of ceasefire
Editorial: Game of ceasefire

Editorial : भारतीय सेनाओं के घातक प्रहारों से जब पाकिस्तान के 6 महत्वपूर्ण एयरबेस और एयर डिफेंस, रडार सिस्टम और करीब 25 फीसदी वायुसेना का बुनियादी ढांचा तबाह हो गया, ‘मिट्टी-मलबा’ हो गया, तब पाकिस्तान को घुटनों पर आना पड़ा। हालांकि इनमें सीमा पर बसे नागरिकों को जान-माल का काफी नुकसान हुआ, लेकिन देशभक्ति और राष्ट्रवाद के नाम पर इन पर सरकार से सवाल करना गुनाह मान लिया गया।

देश ने पहले भी पांच युद्ध देखे हैं, कई बड़े आतंकी हमलों के जख्म खाए हैं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के खिलाफ हुई साजिशों को झेला है, लेकिन शनिवार से लेकर रविवार तक जितने झटके देश को मिले, ऐसा शायद कभी नहीं हुआ। अमरीकी राष्ट्रपति ट्रंप की पोस्ट सार्वजनिक होने से पहले ही पाकिस्तान के डीजीएमओ मेजर जनरल कशीफ अब्दुल्ला ने भारत के समकक्ष लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई को फोन कर युद्धविराम की गुहार लगाई थी।

भारत-पाक में सीधे ही बात हुई। पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने पहले युद्धविराम की घोषणा की। उसके बाद हमारे विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसकी घोषणा पर सहमति जताई। बेशक अमरीकी राष्ट्रपति ट्रंप इस युद्धविराम में मध्यस्थता का श्रेय लेते रहें, लेकिन न तो भारत सरकार यह मध्यस्थता मानती है और न ही देश का आम नागरिक यकीन करता है।

Read Also =Editorial : भारत की तैयारी और नागरिक सुरक्षा

क्या युद्धविराम का सच यही है? गंभीर सवाल यह है कि क्या भारत ने आतंकवाद के खिलाफ अपना तय लक्ष्य हासिल कर लिया है? भविष्य में देश में आतंकी हमला होगा, तो क्या उसे वाकई ‘युद्ध’ करार देते हुए भारत पलटवार करेगा? बेशक भारतीय सेनाओं ने जिस तरह आतंकियों के अड्डे ‘मिट्टी-मलबा’ किए हैं और 100 से अधिक आतंकियों को मौत के घाट उतारा है, वह निश्चित ही विराट सफलता है, लेकिन आतंकियों का आका पाकिस्तान बच गया है।

Read Also =Editorial : कूटनीतिक मोर्चे पर सफलता

बहुत कुछ मिट्टी में मिलाया नहीं जा सका। पाकिस्तान की वायुसेना का बर्बाद ढांचा फिर से खड़ा किया जा सकता है। पाकिस्तान जैसे आतंकी और गैर-जिम्मेदाराना देश से ‘परमाणु शक्ति’ छीनने के प्रयास भी किए जा सकते थे। ‘इस्लामी परमाणु बम’ की अवधारणा के खिलाफ भारत विश्व-मत तैयार कर सकता था।

एक सिरफिरा और आत्मा से ‘रक्तबीज’ जैसा देश कभी भी परमाणु हथियारों का दुरुपयोग कर सकता है। भारत ऐसी भूमिका से वंचित रहा। भारत यह टकराव जीत कर भी विजेता नहीं बन सका।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button