दिल्ली पर ज्यादा असर…स्टडी में दावा, भीषण गर्मी का कहर! ‘लू’ से Danger Zone में देश

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इस साल अप्रैल में ही देश के कई राज्य ‘लू’ (Heat wave) का कहर झेल रहे हैं। इसके पीछे का सबसे बड़ा कारण है जलवायु परिवर्तन। भारत भी जलवायु परिवर्तन का सामना कर रहा है और लोगों पर इसका खासा असर पड़ रहा है। जलवायु परिवर्तन के कारण ही भारत में ‘लू’ लगातार और भी खतरनाक बनती होती जा रही है। जहां देश में मई-जून में लू चलती थी वहीं अप्रैल में ही इसका कहर दिखने लग गया है। इसी बीच एक अध्ययन सामने आया है जिसने मौसम वैज्ञानिकों को चिंता में डाल दिया है। रिसर्च के मुताबिक, देश का 90 प्रतिशत से अधिक हिस्सा लू के प्रभाव से डेंजर ज़ोन (Danger Zone) में है, इसमें दिल्ली का पूरा इलाका शामिल है।

कैंब्रिज यूनिवर्सिटी की स्टडी

यह अध्ययन कैंब्रिज यूनिवर्सिटी में रमित देबनाथ और उनके सहयोगियों ने किया है, जिसमें कहा गया है कि राजधानी दिल्ली लू के प्रभावों की वजह से संवेदनशील है और ‘खतरे के क्षेत्र’ में है। पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के पूर्व सचिव एम राजीवन की वैज्ञानिक कमलजीत रे, आर के गिरि, एस एस रे और ए पी डिमरी के साथ मिल तैयार किए गए रिसर्च के अनुसार, हीटवेव की वजह से भारत में पिछले 50 सालों में 17,000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है।

 

हालांकि यह पेपर 2021 में प्रकाशित हुआ था, जिसमें बताया गया कि 1971 से लेकर 2019 तक देश में लू की 706 घटनाएं हुईं। पिछले रविवार को महाराष्ट्र के नवी मुंबई में एक पुरस्कार समारोह के दौरान लू लगने की वजह से 13 लोगों की मौत हो गई थी। यह लू की वजह से हुई मौत का ताजा मामला है। भारत की जलवायु की स्थिति का आकलन करने के लिए, कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने क्लाइमेट वल्नरबिलिटी इंडेक्स (Climate Vulnerability Index) के साथ देश के हीट इंडेक्स का भी अध्ययन किया।

 

हीटवेव क्या

अगर मैदानी इलाकों में अधिकतम तापमान कम से कम 40 डिग्री सेल्सियस, तटीय क्षेत्रों में कम से कम 37 डिग्री सेल्सियस और पहाड़ी क्षेत्रों में कम से कम 30 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है और सामान्य से कम से कम 4.5 डिग्री सेल्सियस ज्यादा हो जाता है तो उसे हीटवेव घोषित की जाती है।

बेहद गर्म रहा फरवरी

2023 में भारत ने 1901 में रिकॉर्ड-कीपिंग शुरू होने के बाद से अपने सबसे गर्म फरवरी का अनुभव किया। हालांकि, मार्च में सामान्य से अधिक बारिश ने तापमान को नियंत्रित रखा। मार्च 2022 अब तक का सबसे गर्म और 121 वर्षों में तीसरा सबसे सूखा साल था। इस साल 1901 के बाद से देश का तीसरा सबसे गर्म अप्रैल भी देखा गया।

NEWS SOURCE : punjabkesari

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