NDMC में रिक्त पदों को नहीं भरा जा रहा है….

ओपन सर्च.संवाददाता
नई दिल्ली। नई दिल्ली नगर पालिका परिषद (New Delhi Municipal Council) के मुख्य विभागों में अलग-अलग पदों को पिछले कई वर्षों से रिक्त पड़ें हैं जिन्हें प्रशासन उन पदों को भरने की कार्रवाई नहीं कर रहा है। उल्लेखनीय है कि परिषद के वास्तुविद् विभाग, सिविल इंजीनियरिंग विभाग, विद्युत विभाग आदि में तमाम पद खाली पड़े हुए है लेकिन एनडीएमसी के स्थापना विभाग इनकी सुद्घ नहीं ले रहा है। कारण क्या है यह सोचने का भी सवाल है? लगता है स्थापना विभाग के अधिकारी इन विभागों को सिमटाना चाहते हैं, अन्यथा यह पद भर दिए जाते।
कभी ऐसा नहीं हुआ कि एक साथ 25 से 30 पद रिक्त पड़ें हों और उन्हें भरा नहीं गया हो। यूं तो बहुत से विभाग हैं जिनमें पद खाली पड़ें है आज हम बात कर रहें है एनडीएमसी के वास्तुविद् और पर्यावरण विभाग की। सबसे पहले हम यहां बाता दें कि जुलाई सन 2021 में इस विभाग मे मुखिया (मुख्य वास्तुविद्) राजीव सूद की रिटायरमेंट के बाद से अभी तक यह पद खाली पड़ा है उसको भरा नहीं गया क्या करण है? जबकि इस पद को भरने के लिए कई बार विज्ञापन भी दिए गए उसपर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
उल्लेखनीय है कि विभाग के डीसीए को कम से कम जबतक यह पद खाली था उन्हें करंट डियूटी चार्ज दे देना चाहिए था जैसा कि पहले भी होता आया है। लेकिन ऐसा न करते हुए प्रतिनियुक्ति पर आए अधिकारियों को इस पद का काम सौंप दिया गया। जोकि नियमानुसार भी ठीक नहीं लगता। मुख्य वास्तुविद् का पद एक तकनीकि पद है जिसपर कोई भी वास्तुविदी बैठ सकता है और वह वास्तुदि का काम देख सकता है लेकिन ऐसा नहीं किया गया क्यों? इसके पीछे लम्बी कहानी है इसका जिक्र बाद में करेंगे।
हम यह बाता दें कि मुख्य वास्तुविद और पर्यावरण विभाग में जो पद है उनमें एक मुख्य वास्तुदि, तीन उप मुख्य वास्तुविद, चार डिप्टी वास्तुविद और 5 वास्तुविद, 13 सहायक वास्तुविद के अलावा करीब 12 आरकेटेक्चर असिस्टेंड के पद हैं। लेकिन वर्तमान में 1 उप मुख्य वास्तुविद जो कि 31 दिसम्बर को रिटायर हो जाएंगे, 1 वास्तुविद, 2 डिप्टी वास्तुविद और 4 सहायक वास्तुविद हीं काम कर रहें हैं, इसके अलावा सिविल विभाग के इंजीनियर भी यहां काम कर रहें है जोकि उपरोक्त पदों के अलावा हैं।
इससे साफ पता चलता है कि स्थापना विभाग प्रतिनियुक्ति पर आए अधिकारियों को सच्चाई का मालुम हीं नही पड़ने देते जिसके कारण यह पद अभी तक खाली पड़े है, उनकी इस कारगुजारियों से धीरे-धीरे वास्तुविद एवं पर्यावरण विभाग सिमटता जा रहा है। सबसे उल्लेखनीय बात यह है कि परिषद के सदस्य जो सरकार नामित करती है विशेष तौर पर उनका भी यह दायित्व बनता कि वो कर्मचारियों को राहत देने के लिए काम करें लेकिन सभी मेम्बर इसपर ध्यान क्यों नहीं दे रहें है यह सोचने का विषय है।
उल्लेखनीय है कि सन 2005 के बाद इस विभाग में कोई भी नियुक्ति नहीं की गई और सन 2010 से कोई भी पदोनियुक्ति नहीं की गई। आखिर प्रशासन एनडीएमसी कर्मचारियों और अधिकारियों का अधिकार, देने में कब अपनी आंखे खोलेगा या इस विभाग को सिमटा देगा। आगे बता दें कि इसी तरह सिविल विभाग के अन्दर और इलेट्रिकल विभाग में भी स्थापना विभाग पदोनियुक्ति की सुद्घ नहीं ले रहा है जिसकी जानकारी ‘ओपन सर्च ‘ का सर्च जल्द हीं आपके सम्मुख लाएगा।
क्या NDMC के कई विभागों को सिमटाया जा रहा है?
-विद्युत विभाग के मुखिया के काम को मुख्य अभियंता सिविल के अधिन कर दिया गया है जोकि तकनीकि रूप से गलत लगता है।
-एनडीएमसी के एमओएच का काम प्रतिनियुक्ति पर आए शिक्षा निदेशक को दे दिया गया है इसी तरह एनडीएमसी के मुख्य वास्तुविद् का काम प्रतिनियुक्ति पर आए एक दानिक्श अधिकारी को दिया गया है जोकि सत प्रतिशत तकनीकि रूप से गलत है क्योंकि इस काम को एक वास्तुविद् हीं देख सकता है और मुख्य वास्तुविद पद का प्रयोग एक वास्तुविद ही कर सकता है। प्रत्येक वास्तुविद् का पंजीकरण काउंसिल ऑफ आरकेटेक्चर में पंजीकृत होना जरूरी है।



