Healthy body is the real wealth of life: Amit Silavat

जीवन का असली धन निरोगी काया है। इन चंद शब्दों में ही सारा सार छिपा है। इंदिरापुरम निवासी अमित सिलावट बताते हैं कि आज इंदिरापुरम रनिंग एंड राइडिंग ग्रुप के साथ 100 किमी की राइड गाज़ियाबाद से दिल्ली तक की। उन्होंने कहा कि आजकल 100 दिन तक चलने वाली एक वर्चुअल इवेंट में भाग लिया हुआ है, जिससे ग्रुप के साथ अक्सर राइड पर जाना हो जाता है। वो बताते हैं कि साइक्लिंग से आप अपने शहर को तो एक्सप्लोर कर ही सकते हैं, साथ ही साथ नए नए दोस्त भी बन जाते हैं। दुनिया वाकई ऐसे ही हिम्मती लोगों से भरी पड़ी है। बस आप एक बार नजर उठा कर के तो देखिए।
अमित सिलावट आगे बताते हैं कि हमारे एक राइडर मित्र सिद्धार्थ गौतम ने अपनी जीवटता व परिश्रम से अपनी बीमारियों से भरी जिंदगी को एक बार फिर नया रूप, एक नई खुशी दी है और उनके जीने का नजरिया ही बदल गया है। वो भी रेगुलर साइक्लिंग से।
हाई ब्लड प्रेशर और शुगर जैसी बीमारियों ने इन्हें जब घेर लिया और उनका वजन 120 किलो के पार जा पहुंचा तो वे जब डॉक्टर के पास गए तो डॉक्टर के कहे कुछ शब्दों ने वो कारनामा कर दिखाया जो शायद संजीवनी बूटी भी न कर पाती। डॉक्टर ने उन्हें कहा कि “या तो मेरे यहां चक्कर काट लो, या फिर सड़क पर।” फैसला आपका, क्योंकि मेरे यहां तो बस दवाई ही मिलेगी।
बस फिर क्या था, थाम लिया साइकिल का हैंडल हाथ में और बड़ी शिद्दत से ऐसी साइकिल चलाई कि लगभग 3 से 4 महीने में ही अपना वजन 125 किलोग्राम घटाकर 95 किलोग्राम पर ले आए। कमाल की बात तो यह है कि अब वो कोई शुगर, बीपी की दवाई भी नहीं ले रहे। ये आंकड़ा किसी की भी आंखें खोलने के लिए काफी है।
वे आगे बताते हैं कि जो लोग कार्य शुरू करने से पहले ही हिम्मत हार जाते हैं, जिन्दगी में अपने स्वास्थ्य को लेकर बहुत सोचते हैं और करते कुछ नहीं, उनके लिए सिद्धार्थ गौतम एक आदर्श हैं। उनकी फिटनेस यात्रा अनवरत जारी है। ऐसी दृढ़ इच्छाशक्ति ही चाहिए फिर वो चाहे कोई भी क्षेत्र हो।
अमित सिलावट कहते हैं कि आज का अपना 100 किमी साइकिलिंग राइड मैं सिद्धार्थ गौतम के जज्बे को समर्पित करता हूं। मुझे भरोसा है कि इस पोस्ट से प्रेरणा लेकर कोई तो फिटनेस की दुनिया में आने और लाभान्वित होने के लिए अपने कदमों को आगे बढ़ाएगा। अंत में, जो स्वस्थ नहीं है वह बीमार है,
उसकी हर जीत सिर्फ इक हार है।



