अर्थराइटिस

हमारे शरीर में हर अंग की अपनी ही अहमियत है । हर अंग किसी न किसी विशेष कार्य के लिए बना है। अगर इन अंग में किसी भी वजह से कोई भी बीमारी उत्पन्न हो जाती है, या किसी तरह की तकलीफ उत्पन्न होने लगती हैं, तो हमें उससे जुड़े कार्य करने में बहुत ही परेशानी होती है,।
वैसे तो शरीर के सभी अंग बहुत महत्वपूर्ण होते हैं लेकिन प्रतिदिन अगर हम ध्यान दें तो हमारे शरीर में” जोड़ों” की बहुत ही भागीदारी होती है, भागीदारी से तात्पर्य है कि चलने, फिरने उठने, बैठने, झुकने, मुड़ने इत्यादि कार्य मैं जोड़ों की बहुत ही जरूरत पड़ती है। इन सब में हमारे शरीर के जोड़ जो होते हैं वह बहुत ही लाभदायक होते हैं।
जब तक हमारे जोड़ों पर किसी भी तरह की बीमारी का कोई असर नहीं हुआ रहता है तब तक हम अपने दैनिक कार्य और सारी शारीरिक क्रियाएं बहुत ही अच्छे से कर पाते हैं। परंतु अगर हमारी जोड़ों में किसी भी तरह की बीमारी उत्पन्न हो जाती है, तो यह बीमारियां बहुत ही दर्द युक्त, बहुत ही लंबी अवधि तक चलने वाली बीमारियां होती हैं 40 या 45 वर्ष की आयु के आसपास जोड़ों से संबंधित बीमारियां उत्पन्न होती है। ज्यादातर यह बीमारी पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं में देखी जाती है इस तरह की जोड़ों से संबंधित बीमारी उत्पन्न हो जाने पर उसका सीधा सीधा प्रभाव व्यक्ति के पोषण के स्तर पर पड़ता है।
क्योंकि जब हमारे जोड़ों में दर्द होता है तो हम ना ठीक से चलने चलते हैं ना ही ठीक से हम किसी कार्य को करने के लिए सक्षम होते हैं और ज्यादा से ज्यादा हम बिस्तर पर लेटे रहना ही पसंद करते हैं जिससे हमारे शरीर के पोषक तत्वों का ऋण आत्मक संतुलन उत्पन्न हो जाता है इस तरह से जोड़ों की बीमारियों में भोजन ग्रहण करने की प्रक्रिया केवल प्रभावित नहीं होती वरन चयापचय भी प्रभावित होता है जिसका सीधा प्रभाव व्यक्ति की पोषक तत्व की आवश्यकता पर पड़ता है। जोड़ों से संबंधित सबसे महत्वपूर्ण जो बीमारी है वह है “अर्थराइटिस” क्या होता है यह अर्थराइटिस?
” जोड़ों के संक्रमण व सूजन को ही अर्थराइटिस कहा जाता है “यह दो प्रकार से आपको देखने को मिलता है।
एक्यूट और क्रोनिक।
एक्यूट आर्थराइटिस कम समय के लिए उत्पन्न होता है। परन्तु दोबारा इसके होने पर ये क्रोनिक आर्थराइटिस में बदल जाता है। क्रोनिक आर्थराइटिस
भी दो प्रकार के होते हैं
रूमेटाइड आर्थरइटिस
ऑस्टियोआर्थराइटिस
यह बीमारी सभी उम्र वर्ग के लोगों में हो सकती हैं। आज मैं आप सबको यहांंं रूमेटाइड अर्थराइटिस केे बारे मैं बताने जा रही हूं। किन-किन चीजोंं को हम अपने भोजन में शामिल करें और किन-किन चीजों की वजह से हमें इस तरह की अर्थराइटिस का सामना करनााा पड़ता है इन्हींंं सब के बारे में मैं आप सबको कुछ महत्वपूर्ण बातें बताने जा रही हूं।
इस प्रकार के अर्थराइटिस में हमारे जोड़ों की सायनोवियल मेंब्रेन प्रभावित होती है यह मेंब्रेन आकार में मोटी हो जाती है और इसके अंदर संक्रमण के कारण सूजन आ जाती है जिसकी वजह से इसमें एक तरल पदार्थ जमा हो जाता है जो रोगी व्यक्ति के प्लाज्मा में एक विशेष प्रकार के रूमेटाइड फैक्टर की उपस्थिति को दिखाता है यह एक ऑटो इम्यून डिसऑर्डर है जिसमें स्वता शरीर की संक्रमण रोकने की क्षमता प्रभावित हो जाती है। इस बीमारी में अक्सर हाथ व पैर की उंगलियों के जो सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं बीमारी की अवस्था में कई बार भूख भी नहीं लगती हमें बुखार भी हो सकता है कमजोरी भी आती है
खानपान के द्वारा उपचार
अगर बीमारी शुरू होते ही हमें पता लग जाता है इसे काफी हद तक खान-पान से ही दूर कर सकते हैं। कहने का यह तात्पर्य है कि हमारे खान पान में कौन सी चीज हमें ऐसी अवस्था में खानी चाहिए और कौन सी नहीं खानी चाहिए इसकी पूरी जानकारी लेकर और एक व्यवस्थित रूप से हम अपना आहार नियोजन करवा कर इस बीमारी से काफी हद तक मुक्ति पा सकते है।



