ठण्ड में हृदय रोगियों की हृदय रोग से सुरक्षा एवं बचाव जरूरी: डॉ असित खन्ना

डॉ असित खन्ना, वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ, यशोदा सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, कौशांबी, गाजियाबाद।
कमलेश पांडेय/विशेष संवाददाता
गाजियाबाद। यशोदा सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, कौशाम्बी, गाजियाबाद के वरिष्ठ हृदयरोग विशेषज्ञ डॉ असित खन्ना (Dr. Asit Khanna) ने मौसम परिवर्तन और बारिश के बाद बढ़ती हुई ठण्ड में अपने हृदय की सुरक्षा के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि ठण्ड के दिनों में हृदय रोगियों को दिक्कत बढ़ जाती है, तापमान कम होने से खून की नालियां सिकुड़ जाती हैं और हृदय को रक्त पहुंचने वाली धमनियों में खून का संचार अवरोधित हो सकता है और हृदय तक ऑक्सीजन पहुंचने की मात्रा कम हो जाती है। इससे हृदय को शरीर में खून और ऑक्सीजन पहुंचाने के लिए अतिरिक्त श्रम करना पड़ता है जिसकी वजह से अन्य कारणों के मिलाने से हृदयाघात का ख़तरा बढ़ जाता है और मरीजों के अस्पताल में भर्ती होने की संख्या भी बढ़ जाती है। साथ ही हृदय गति रुकने से मौत होने के मामले भी बढ़ जाते हैं।
उन्होंने बताया कि ठण्ड के दिनों में धूप निकलने के बाद ही हृदय रोगी टहलने निकलें, पर्याप्त ऊनी कपड़े के साथ अंदर वार्मर भी पहनें। जहां तक हो आयल वाले हीटर का प्रयोग कर अपने घर को गर्म रखें। शारीरिक ऊर्जा प्राप्त करने के अल्कोहल, धूम्रपान, वसा युक्त भोजन से बचें। उसकी जगह संतुलित भोजन एवं ड्राई फ्रूट्स लें। घर में नियमित व्यायाम करें और अचानक से घर से बाहर न निकलें। अपने ब्लड प्रेशर को मॉनिटर करें और इसे बढ़ने ना दें। अपनी दवाइयां समयानुसार लेते रहे और जांचें नियमित रूप से कराते रहें।  यदि कोई असुविधा महसूस हो तो तुरंत अपने हृदय रोग चिकित्सक से संपर्क करें।
डॉ असित खन्ना ने कहा कि हृदय रोगियों को अपनी जेब में या एक आई डी कार्ड या बैंड बना कर अपने पास जरूर रखना चाहिए और यदि हृदयाघात के कोई भी लक्षण महसूस हों जैसे कि अगर छाती में दबाब, पसीना आना, दोनों बाजू में दर्द या बाएं हाथ में दर्द, पसीना आना, घबराहट होना तो ये हार्ट अटैक हो सकता है। आमतौर पर लोग इन लक्षणों को गैस समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। जबकि यह एक गंभीर समस्या है, जो मरीज के लिए जानलेवा साबित हो सकता है। सीने में दर्द, जलन व भारीपन हार्ट अटैक की निशानी है। इन लक्षणों को नजरअंदाज करने की बजाय तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
डॉ खन्ना ने जोर देते हुए कहा कि दिल का दौरा पड़ने की स्थिति में सभी हृदय रोगियों एवं बुजुर्गों के पास जीवन रक्षक दवाएं एक पाउच में हमेशा उपलब्ध होनी चाहिए, जिनमें 6 गोलियाँ प्रमुख हैं : जोर से चक्कर आने पर, अचानक से घबराहट, पसीना और उल्टी होने पर तुरंत डिस्प्रिन 325 मिली ग्राम की 1 टैबलेट (1 कटोरी पानी में घोल कर लेनी है), क्लोपिडोग्रिल 75 मिली ग्राम की 4 टैबलेट (एक साथ पानी से लेनी है) और एटोरवास्टेटिन 80 मिली ग्राम की 1 गोली (पानी से लेनी है ) और अतिरिक्त एक गोली सॉर्बिट्रेट की तब लेनी है जब सीने में भारीपन और दर्द हो, विशेषतः सीने में बायीं तरफ तो जीभ के नीचे सॉर्बिट्रेट की 5 मिलीग्राम की 1 गोली पानी से लेनी है। और यह दवाइयां लेने के बाद जल्द से जल्द नजदीक के हृदय  रोग के इलाज की सुविधा वाले या इमरजेंसी वाले हॉस्पिटल में मरीज को पहुँचाना है।
डॉ खन्ना ने बताया कि अगर हृदय संबंधी बीमारियों से बचना है तो अपने हृदय को स्वस्थ रखने के लिए निम्नलिखित उपाय करें, ये सहायक सिद्ध हो सकते हैं – पहला, प्रतिदिन अन्य कार्यों की तरह ही व्यायाम के लिए भी समय निकालें। दूसरा, सुबह और शाम के समय पैदल चलें या सैर पर जाएं। तीसरा, भोजन में नमक और वसा की मात्रा कम कर लें, अधिक मात्रा में यह हानिकारक होते हैं।
चौथा, ताजे फल और सब्जियों को आहार में शामिल करें।
पांचवां, तनावमुक्त जीवन जिएं। तनाव अधि‍क होने पर योगा व ध्यान के द्वारा इस पर नियंत्रण करें। छठा, धूम्रपान एवं मदिरापान का सेवन बिल्कुल बंद कर दें, यह हृदय रोगों के साथ ही कई बीमारियों का कारक है। सातवां, स्वस्थ शरीर और दिल के लिए भरपूर नींद लें।

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