नशीली दवाओं से मुक्त बचपन के लिए एक मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र बनाने की जरूरत- राजेंद्र पाल गौतम

नई दिल्ली। दिल्ली के महिला एवं बाल विकास मंत्री राजेंद्र पाल गौतम ने ‘सूर्याेदय’ योजना की प्रगति और क्रियान्वयन को लेकर विभागीय अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय बैठक कर समीक्षा की। यह योजना राष्ट्रीय राजधानी में विशेष रूप से युवाओं के बीच पुनर्वास के माध्यम से नशीली दवाओं के दुरुपयोग को रोकने के लिए लाई गई है।

इस बैठक में डॉ. रश्मि सिंह, (आईएएस) विशेष सचिव व सह निदेशक, एससी वत्स, संयुक्त निदेशक, प्रख्यात मनोचिकित्सक डॉ. जितेंद्र नागपाल, विशेष शिक्षक सह मनोवैज्ञानिक डॉ. मुदिता यादव व डॉ राजेश सहित संबंधित गैर सरकारी संगठन के प्रतिनिधि भी मौजूद थे।

महिला एवं बाल विकास मंत्री राजेंद्र पाल गौतम ने बैठक में ‘सूर्योदय’ योजना को प्रभावी रूप से लागू करने और इसके कार्यान्वयन पर चिंता जताई। इस दौरान मंत्री राजेंद्र पाल गौतम ने मादक पदार्थों के सेवन से पीडित युवाओं और उनके परिवारों के सफलता पूर्वक पुनर्वास की जरूरत पर बल दिया।

मंत्री राजेंद्र पाल गौतम ने कहा कि इस देश के युवा मादक द्रव्यों के सेवन के शिकार हो रहे हैं। 10 और 11 वर्ष की आयु के बच्चे भी मादक पदार्थों के सेवन के शिकार हो रहे हैं। इनका मादक पदार्थों के सेवन का शिकार होना, माता-पिता और स्कूलों से लेकर प्रवर्तन एजेंसियों तक बड़े पैमाने पर समाज की विफलता है। उन्होंने कहा कि हमें नशीली दवाओं से मुक्त बचपन के लिए एक मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र बनाने की जरूरत है।

महिला एवं बाल विकास मंत्री ने आगे कहा कि नशीली दवाओं के दुरुपयोग से पीड़ितों के पुनर्वास के लिए सभी एजेंसियों की ओर से सर्वाेत्तम कार्यक्रमों की प्रभावी निगरानी, मूल्यांकन और कार्यान्वयन करना महत्वपूर्ण है। शिक्षा, सामाजिक न्याय, पुलिस और कानून प्रवर्तन सहायता और बाल अधिकार आयोग जैसे विभिन्न विभागों के सभी हितधारकों को आपस में समन्वय बनाकर काम करने की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि इसके लिए सभी एजेंसियों को एक साथ आना चाहिए और ‘सूर्याेदय’ योजना के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए मिलकर काम करना चाहिए। हमें न केवल नशीली दवाओं के शिकार बच्चे का पुनर्वास करने की आवश्यकता है, बल्कि उनके परिवारों को परामर्श भी प्रदान करना है।

जुलाई 2021 में, मंत्री राजेंद्र पाल गौतम ने दिल्ली में नशामुक्ति केंद्र, सूर्याेदय केंद्र का उद्घाटन किया। वन-स्टॉप सेंटर परामर्श आदि के माध्यम से मादक द्रव्यों के सेवन के पीड़ितों का पुनर्वास करता है।

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