अफगानिस्तान की घटना के बाद जम्मू-कश्मीर में बढ़ रहा कट्टरपंथ

अमित शाह ने की सुरक्षा स्थिति को लेकर बैठक

तालिबान के अफगानिस्तान पर कब्जा करने के बाद पहली बार केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने आज जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा स्थिति की समीक्षा की। बता दें कि अफगानिस्तान में बदलते हालात के साथ कश्मीर घाटी में बढ़ते कट्टरपंथ को लेकर भारत सरकार चिंतित है। इस बैठक में सेना प्रमुख एमएम नरवणे, जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा, एनएसए अजीत डोभाल, रॉ के सचिव सामंत गोयल और जम्मू-कश्मीर के अन्य हितधारकों ने भाग लिया।

बैठक में सीमा सुरक्षा बल के अर्धसैनिक प्रमुख पंकज सिंह और सीआरपीएफ के कुलदीप सिंह भी मौजूद थे। मीटिंग से पहले उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि बैठक केंद्र शासित प्रदेश के विकास और सुरक्षा की स्थिति की समीक्षा के लिए बुलाई गई है। घाटी में बढ़ते कट्टरपंथ की खबरों के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि सुरक्षा स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। उन्होंने कहा कि अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी की मौत के बाद घाटी में कुछ पाबंदियां लगाई गई थी, जिन्हें हटा लिया गया है और उनकी मौत के बाद राज्य में किसी प्रकार की अशांति की कोई खबर नहीं आई है।

बता दें कि कश्मीर के कुछ इलाकों मुख्य रूप से दक्षिण कश्मीर के सापोर, शोपियां इलाके में कट्टरपंथ के बढ़ने की खबरें सामने आई हैं। मनोज सिन्हा ने कहा कि कश्मीर घाटी के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा, ‘अफगानिस्तान की स्थिति ने कश्मीर में कट्टरपंथी तत्वों के लिए एक बड़ा बढ़ावा दिया है और हम लगातार निगरानी कर रहे हैं।’ उन्होंने कहा कि पाकिस्तान जम्मू और कश्मीर में हिंसा के स्तर को बढ़ाने के प्रयासों को आगे बढ़ाने जा रहा है, इसलिए हमें अपनी सुरक्षा ग्रिड को और मजबूत करने की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि कश्मीर के लोगों में अफगानिस्तान में मानवाधिकारों के उल्लंघन को लेकर गुस्सा देखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह कट्टरपंथ को बढ़ावा दे सकता है। उन्होंने कहा कि लोग पिछली और वर्तमान सरकार की तुलना कर रहे हैं। रोजगार या विकास के मामले में उन्हें कुछ ज्यादा सकारात्मक दिखाई नहीं दे रहा है, जिसके कारण अलगाव की स्थिति पैदा हो रही है। विकास की परियोजनाओं में गति समय की मांग है।

गृह मंत्रालय के आंकड़े के अनुसार घाटी में 82 लोग लापता है, अंदेशा है कि वे सभी आतंकवादी संगठनों में शामिल हो चुके हैं। सरकार की दूसरी चिंता इस बात को लेकर है कि घाटी में इस साल के शुरुआती 8 महीनों में 120 आतंकवादी मारे गए थे, जिनमें से केवल 10 प्रतिशत विदेशी आतंकवादी थे बाकी सब स्थानीय थे। आंकड़ों के मुताबिक घाटी में अभी 200 आतंकवादी सक्रिय हैं। इनमें से ज्यादातर जैश, लश्कर और कुछ अल बद्र से जुड़े हुए हैं।

News Source : oneindia.com

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