SBI का बड़ा कदम: अब UPI ट्रांजैक्शन से तय होगी लोन की पात्रता, छोटे कारोबारियों को मिलेगा फायदा

UPI ट्रांजैक्शन से समझी जाएगी कारोबार की बिक्री

SBI UPI Loan: UPI ट्रांजैक्शन से तय होगी लोन पात्रता, छोटे कारोबारियों को फायदा
SBI UPI Loan: UPI ट्रांजैक्शन से तय होगी लोन पात्रता, छोटे कारोबारियों को फायदा

SBI UPI Loan: भारतीय स्टेट बैंक (SBI) छोटे कारोबारियों को कर्ज उपलब्ध कराने के तरीके में बड़ा बदलाव करने की तैयारी कर रहा है। बैंक अब UPI ट्रांजैक्शन के डेटा का इस्तेमाल छोटे कारोबारियों की लोन पात्रता का आकलन करने के लिए करने पर काम कर रहा है। खास बात यह है कि इस व्यवस्था से उन कारोबारियों को फायदा मिल सकता है, जिनके पास GST रजिस्ट्रेशन नहीं है।

SBI के वरिष्ठ अधिकारी और प्रबंध निदेशक अश्विनी कुमार तिवारी ने इस नई व्यवस्था के बारे में जानकारी दी है। बैंक का मानना है कि डिजिटल पेमेंट के बढ़ते इस्तेमाल के बीच UPI ट्रांजैक्शन छोटे कारोबार की बिक्री और कैश फ्लो को समझने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन सकता है।

UPI ट्रांजैक्शन से समझी जाएगी कारोबार की बिक्री

छोटे कारोबारियों के सामने अक्सर सबसे बड़ी समस्या यह होती है कि बैंक के पास उनकी कमाई और कारोबार की वास्तविक स्थिति को साबित करने के लिए पर्याप्त औपचारिक आंकड़े उपलब्ध नहीं होते। खासकर ऐसे कारोबारी जिनका GST रजिस्ट्रेशन नहीं है, उन्हें लोन लेने में मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।

SBI इसी समस्या का समाधान निकालने के लिए एक UPI आधारित लोन असेसमेंट सिस्टम विकसित कर रहा है। इसके तहत अगर किसी छोटे कारोबारी के पास लगातार बिक्री हो रही है और ग्राहक उसे UPI के माध्यम से भुगतान कर रहे हैं, तो इन डिजिटल लेनदेन को कारोबार की बिक्री के संकेतक के रूप में देखा जा सकता है।

इससे बैंक को कारोबारी की आमदनी और लेनदेन की नियमितता को समझने में मदद मिल सकती है।

GST रजिस्टर्ड कारोबारियों को 10 मिनट में लोन

अश्विनी कुमार तिवारी के मुताबिक, GST के तहत रजिस्टर्ड कारोबारियों को लोन देने से जुड़ी चुनौती को SBI काफी हद तक हल कर चुका है। बैंक GST और PAN से जुड़े डेटा का इस्तेमाल करके ऐसे कारोबारियों की क्रेडिट क्षमता का आकलन कर रहा है।

बैंक का दावा है कि वह पात्र GST रजिस्टर्ड कारोबारियों को करीब 10 मिनट में लोन देने की स्थिति में है।

पिछले 18 महीनों के दौरान SBI ने GST और PAN से उपलब्ध आंकड़ों का इस्तेमाल करके लगभग 1 लाख करोड़ रुपये के लोन दिए हैं। इससे पता चलता है कि बैंक डिजिटल और वैकल्पिक डेटा के आधार पर कर्ज देने की प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ा रहा है।

GST नंबर नहीं होने पर क्यों आती है परेशानी?

भारत में बड़ी संख्या में छोटे कारोबारी ऐसे हैं जो अपने कारोबार के आकार या नियमों के तहत GST रजिस्ट्रेशन के दायरे में नहीं आते। ऐसे कारोबारियों के पास बैंक के सामने अपनी नियमित आय और बिक्री को साबित करने के लिए सीमित औपचारिक दस्तावेज हो सकते हैं।

पारंपरिक लोन प्रक्रिया में बैंक आमतौर पर आय, कारोबार, टैक्स रिकॉर्ड और अन्य वित्तीय जानकारी को देखकर कर्ज की पात्रता तय करता है। ऐसे में GST डेटा उपलब्ध नहीं होने पर छोटे कारोबारियों के लिए क्रेडिट असेसमेंट चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

यहीं पर UPI जैसे डिजिटल पेमेंट डेटा की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।

बैंक को UPI का पूरा डेटा सीधे नहीं मिलता

UPI आधारित लोन मॉडल को लेकर एक महत्वपूर्ण सवाल यह भी है कि कारोबारी के डिजिटल भुगतान की पूरी जानकारी बैंक तक कैसे पहुंचेगी।

अश्विनी कुमार तिवारी ने बताया कि कर्ज देने वाले बैंक के पास हमेशा यह स्पष्ट जानकारी नहीं होती कि किसी UPI लेनदेन में पैसा किस दिशा में जा रहा है। हालांकि, प्राप्तकर्ता बैंक और लेनदेन में शामिल थर्ड-पार्टी पेमेंट ऐप के पास इस संबंध में अधिक जानकारी हो सकती है।

इसलिए भविष्य में ग्राहक की सहमति के आधार पर अलग-अलग डिजिटल स्रोतों से प्राप्त जानकारी को क्रेडिट असेसमेंट मॉडल में शामिल किया जा सकता है।

ग्राहक की सहमति होगी अहम

SBI की प्रस्तावित व्यवस्था में ग्राहक की सहमति एक महत्वपूर्ण पहलू होगी। बैंक UPI पेमेंट से जुड़े आंकड़ों के अलावा टेलीकॉम कंपनियों से मिलने वाले अन्य डेटा जैसे वैकल्पिक स्रोतों का इस्तेमाल करके ग्राहक की लोन पात्रता का आकलन करने वाला मॉडल तैयार कर सकता है।

इसका उद्देश्य यह पता लगाना होगा कि छोटे कारोबारी का कारोबार कितना नियमित है, उसकी बिक्री में किस तरह का पैटर्न है और वह कर्ज चुकाने की क्षमता रखता है या नहीं।

हालांकि, इस तरह के डेटा के इस्तेमाल में ग्राहक की अनुमति, डेटा सुरक्षा और प्राइवेसी जैसे पहलू भी महत्वपूर्ण होंगे।

छोटे कारोबारियों के लिए क्या बदल सकता है?

अगर SBI का UPI आधारित लोन मॉडल सफल रहता है, तो इसका सबसे बड़ा फायदा छोटे कारोबारियों को मिल सकता है। जिन कारोबारियों के पास GST रिकॉर्ड नहीं है, उनके लिए नियमित UPI लेनदेन एक तरह का डिजिटल वित्तीय रिकॉर्ड बन सकता है।

उदाहरण के तौर पर, किसी छोटी दुकान, सर्विस प्रोवाइडर या अन्य कारोबारी को रोजाना ग्राहकों से UPI के जरिए भुगतान मिलता है। अगर इन लेनदेन का पैटर्न नियमित है, तो बैंक इसे कारोबारी गतिविधि का एक संकेत मानकर क्रेडिट असेसमेंट में शामिल कर सकता है।

इससे छोटे कारोबारियों के लिए औपचारिक बैंकिंग सिस्टम से कर्ज हासिल करना आसान हो सकता है।

SBI का फोकस डिजिटल लोन पर

SBI पिछले कुछ समय से डेटा आधारित और डिजिटल लोन प्रक्रिया को बढ़ावा दे रहा है। GST और PAN जैसे उपलब्ध डिजिटल रिकॉर्ड के जरिए बैंक पहले ही बड़े पैमाने पर लोन दे चुका है।

अब GST रजिस्ट्रेशन से बाहर रहने वाले कारोबारियों तक पहुंच बनाने के लिए UPI ट्रांजैक्शन जैसे वैकल्पिक डेटा स्रोतों का इस्तेमाल बैंकिंग क्षेत्र में एक नया रास्ता खोल सकता है।

अगर यह मॉडल प्रभावी तरीके से लागू होता है, तो छोटे कारोबारियों के लिए लोन आवेदन और क्रेडिट असेसमेंट की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक तेज और डेटा आधारित हो सकती है।

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