पुतिन से गले मिले मोदी, ईरानी राष्ट्रपति का थामा हाथ… BRICS से दुनिया को क्या संदेश दे रहे हैं PM मोदी?

BRICS Summit 2026: पुतिन से गले मिले मोदी, पेजेश्कियान का थामा हाथ
पुतिन से गले मिले मोदी, ईरानी राष्ट्रपति का थामा हाथ… BRICS से दुनिया को क्या संदेश दे रहे हैं PM मोदी?

राजधानी दिल्ली में होने वाले BRICS Summit 2026 से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दो तस्वीरों ने सबका ध्यान खींच लिया है। शुक्रवार शाम BRICS बिजनेस फोरम के दौरान पीएम मोदी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का गर्मजोशी से स्वागत किया और उनसे गले मिले। इसके कुछ ही देर बाद ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान के साथ भी पीएम मोदी का आत्मीय अंदाज नजर आया। मोदी ने ईरानी राष्ट्रपति का हाथ थामकर उनसे बातचीत की।

दोनों तस्वीरें ऐसे समय सामने आई हैं, जब दुनिया कई बड़े भू-राजनीतिक तनावों से गुजर रही है। रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध हो या पश्चिमी देशों और ईरान के बीच तनाव, इन परिस्थितियों में भारत का रूस और ईरान दोनों के साथ संवाद बनाए रखना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण संदेश माना जा रहा है।

पुतिन से मुलाकात ने खींचा सबका ध्यान

BRICS बिजनेस फोरम में प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन की मुलाकात काफी गर्मजोशी भरी रही। दोनों नेताओं के गले मिलने की तस्वीर सामने आते ही यह चर्चा शुरू हो गई कि भारत वैश्विक राजनीति के मौजूदा तनावपूर्ण माहौल में किस तरह अपनी कूटनीतिक भूमिका को आगे बढ़ा रहा है।

रूस इस समय यूक्रेन के साथ लंबे युद्ध में उलझा हुआ है। इस युद्ध को लेकर रूस और अमेरिका तथा उसके सहयोगी देशों के बीच गंभीर मतभेद हैं। ऐसे में भारत का रूस के साथ संवाद और उच्चस्तरीय संपर्क लगातार बना हुआ है।

मोदी-पुतिन की यह मुलाकात इसी व्यापक कूटनीतिक संदर्भ में देखी जा रही है।

ईरानी राष्ट्रपति का हाथ थामकर मोदी ने क्या संदेश दिया?

दूसरी तस्वीर ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान के साथ प्रधानमंत्री मोदी की है। मोदी ने पेजेश्कियान का हाथ थामकर उनका स्वागत किया और दोनों नेताओं के बीच बातचीत हुई।

ईरान भी इस समय वैश्विक राजनीति के केंद्र में है। अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से तनावपूर्ण संबंध रहे हैं। ऐसे माहौल में भारतीय प्रधानमंत्री का ईरानी नेतृत्व के साथ खुले तौर पर संवाद करना यह संकेत देता है कि नई दिल्ली अलग-अलग शक्ति केंद्रों के साथ अपने रिश्ते बनाए रखने की नीति पर कायम है।

यही वजह है कि BRICS मंच से सामने आईं ये तस्वीरें सिर्फ सामान्य कूटनीतिक मुलाकात नहीं, बल्कि भारत की विदेश नीति के बड़े संदेश के तौर पर भी देखी जा रही हैं।

भारत बन रहा है ‘डिप्लोमैटिक ब्रिज’?

BRICS Summit 2026 से पहले प्रधानमंत्री मोदी की इन मुलाकातों का सबसे बड़ा संदेश यही माना जा रहा है कि भारत खुद को वैश्विक शक्तियों के बीच संवाद और सहयोग के एक महत्वपूर्ण सेतु के रूप में स्थापित करना चाहता है।

भारत एक तरफ रूस के साथ अपने पारंपरिक रणनीतिक संबंधों को आगे बढ़ा रहा है, वहीं ईरान के साथ भी बातचीत और सहयोग जारी रखे हुए है। इसके साथ ही भारत पश्चिमी देशों के साथ अपने आर्थिक और रणनीतिक रिश्तों को भी मजबूत कर रहा है।

यानी नई दिल्ली की कोशिश किसी एक खेमे में जाने के बजाय अलग-अलग देशों के साथ अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर संबंध बनाए रखने की है।

BRICS बिजनेस फोरम में PM मोदी ने कही बड़ी बात

BRICS बिजनेस फोरम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने वैश्विक व्यापार की चुनौतियों पर भी बात की। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार को आगे बढ़ाने के लिए समुद्री रास्तों का सुरक्षित रहना जरूरी है। साथ ही सप्लाई रूट खुले रहने और नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर भी उन्होंने जोर दिया।

प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत नौवहन की स्वतंत्रता और नाविकों की सुरक्षा का दृढ़ समर्थक है।

वैश्विक स्तर पर बढ़ते संघर्षों और व्यापारिक बाधाओं के बीच समुद्री मार्गों की सुरक्षा का मुद्दा बेहद महत्वपूर्ण हो गया है। दुनिया के बड़े हिस्से का व्यापार समुद्री रास्तों से होता है। ऐसे में भारत की ओर से इस मुद्दे को BRICS जैसे मंच पर प्रमुखता देना अहम माना जा रहा है।

2 लाख से ज्यादा स्टार्टअप, 120 यूनिकॉर्न का किया जिक्र

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की स्टार्टअप अर्थव्यवस्था की ताकत भी दुनिया के सामने रखी। उन्होंने कहा कि भारत में दो लाख से अधिक पंजीकृत स्टार्टअप और 120 यूनिकॉर्न हैं।

प्रधानमंत्री के मुताबिक भारत सिर्फ एक बड़ा बाजार नहीं है, बल्कि वैश्विक समस्याओं के समाधान और नए इनोवेशन का भी महत्वपूर्ण केंद्र बन रहा है।

यह संदेश BRICS देशों के बीच व्यापार और तकनीकी सहयोग बढ़ाने की भारत की कोशिश से भी जुड़ा है।

BRICS देशों के कारोबार को लेकर मोदी ने रखा बड़ा प्रस्ताव

प्रधानमंत्री मोदी ने BRICS व्यापार परिषद के सामने कई लक्ष्य भी रखे। उन्होंने परिषद से 10 व्यापार बाधाओं को दूर करने के लिए रिपोर्ट तैयार करने का आग्रह किया।

इसके अलावा उन्होंने हर साल 100 BRICS स्टार्टअप को विस्तार देने में मदद करने और BRICS देशों के बीच 1,000 नई साझेदारियां विकसित करने का सुझाव दिया।

पीएम मोदी ने इस बात पर भी जोर दिया कि इन लक्ष्यों की सिर्फ घोषणा नहीं होनी चाहिए, बल्कि हर साल इन पर हुई प्रगति की समीक्षा की जानी चाहिए।

‘अनिश्चितता के दौर में भारत भरोसे का स्रोत’

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत विकास और स्थिरता के लिए भरोसे का स्रोत बनकर उभर रहा है।

उन्होंने यह भी कहा कि जिस समय दुनिया में व्यापारिक बाधाएं बढ़ रही हैं, भारत आर्थिक सेतु बनाने की दिशा में काम कर रहा है।

यह बयान ऐसे समय आया है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था भू-राजनीतिक तनाव, व्यापारिक प्रतिबंधों और सप्लाई चेन से जुड़ी चुनौतियों का सामना कर रही है।

BRICS Summit से भारत का बड़ा संदेश क्या है?

BRICS सम्मेलन से पहले पीएम मोदी की पुतिन और पेजेश्कियान के साथ हुई मुलाकातों और बिजनेस फोरम में दिए उनके संबोधन को एक साथ देखें तो भारत का संदेश काफी स्पष्ट नजर आता है।

भारत वैश्विक तनावों के बीच संवाद का रास्ता खुला रखना चाहता है।

नई दिल्ली का जोर केवल राजनीतिक संबंधों पर नहीं, बल्कि व्यापार, स्टार्टअप, निवेश, तकनीक और आर्थिक साझेदारी को मजबूत करने पर भी है।

पुतिन से गले मिलना और ईरानी राष्ट्रपति का हाथ थामना इसी व्यापक कूटनीतिक तस्वीर का हिस्सा माना जा सकता है। BRICS Summit 2026 में दुनिया की नजर इस बात पर रहेगी कि भारत वैश्विक शांति, आर्थिक सहयोग और बदलती विश्व व्यवस्था को लेकर किस तरह अपनी भूमिका सामने रखता है।

क्यों अहम है BRICS Summit 2026?

नई दिल्ली में होने वाला यह BRICS सम्मेलन भारत के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि BRICS अब सिर्फ आर्थिक सहयोग का मंच नहीं रह गया है। बदलती वैश्विक राजनीति में यह संगठन दुनिया की उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच सहयोग और संवाद का महत्वपूर्ण मंच बनता जा रहा है।

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ऐसे में पीएम मोदी की पुतिन और पेजेश्कियान के साथ मुलाकातें और BRICS बिजनेस फोरम में उनका आर्थिक सहयोग पर जोर भारत की बढ़ती कूटनीतिक भूमिका की ओर इशारा करता है।

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