Editorial : आस्था-पर्यावरण और संस्कृति का महापर्व ‘छठ’

Editorial : 'Chhath', the festival of faith, environment and culture

Editorial : 'Chhath', the festival of faith, environment and culture
Editorial : ‘Chhath’, the festival of faith, environment and culture

हर वर्ष कार्तिक शुक्ल पक्ष की षष्ठी को मनाया जाने वाला छठ पर्व भारतीय संस्कृति की गहराई, लोक आस्था और प्रकृति के प्रति सम्मान का अद्वितीय उदाहरण है। वर्ष 2025 में यह पर्व और भी भव्यता व श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है। यह पर्व मुख्यतः पूर्वी भारत—बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और नेपाल के तराई क्षेत्रों में मनाया जाता है, लेकिन आज इसकी गूंज देश के हर कोने और विदेशों तक पहुंच चुकी है।

छठ पूजा सूर्य उपासना का पर्व है, जिसमें अस्त होते और उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। यह पर्व केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता, स्वच्छता, अनुशासन और प्रकृति के साथ सामंजस्य का भी प्रतीक है। चार दिनों तक चलने वाले इस व्रत में व्रती कठोर नियमों का पालन करते हैं निराहार रहना, गंगाजल से स्नान करना, स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना और पूरी श्रद्धा से पूजा करना।

छठ पूजा की एक और विशेष बात यह है कि इसमें कोई मूर्ति-पूजन नहीं होता, बल्कि सूर्य जो प्रत्यक्ष देवता हैं—की उपासना की जाती है। यह पर्व हमें सिखाता है कि प्रकृति की शक्तियों को पहचानें, उनका आदर करें और उनसे संतुलन बनाकर चलें। आज जब पर्यावरण संकट गहराता जा रहा है, तब छठ पूजा का संदेश और भी प्रासंगिक हो जाता है।

समाज के लिए यह अवसर है कि हम इस पर्व के माध्यम से स्वच्छता, स्वास्थ्य, जल संरक्षण और पारिवारिक एकता जैसे मूल्यों को और अधिक मजबूत करें। प्रशासन और आमजन को मिलकर यह सुनिश्चित करना चाहिए कि घाटों की सफाई हो, गंदगी न फैले, कृत्रिम घाटों को सुरक्षित बनाया जाए और पर्यावरण का संरक्षण हो।

छठ पूजा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सांस्कृतिक चेतना का उत्सव है, जो पीढ़ियों को जोड़ता है। यह पर्व हमें सिखाता है कि आस्था केवल पूजा तक सीमित नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी का भी हिस्सा है।

Editorial : आम जनता की पहुंच से बाहर हुआ सोना

आइए, छठ पूजा 2025 के इस पावन अवसर पर हम सभी मिलकर संकल्प लें कि न केवल धार्मिक भावनाओं को, बल्कि प्रकृति, समाज और संस्कृति को भी सहेजेंगे और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सकारात्मक विरासत छोड़ेंगे।

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