Editorial : आम जनता की पहुंच से बाहर हुआ सोना
Editorial: Gold is out of reach of common people

Editorial : दिवाली भारत में न केवल एक धार्मिक और सांस्कृतिक पर्व है, बल्कि परंपराओं से जुड़ा एक आर्थिक उत्सव भी है। विशेष रूप से धनतेरस और लक्ष्मी पूजन के अवसर पर स्वर्ण आभूषण खरीदना शुभ माना जाता है। लेकिन वर्ष 2025 की दिवाली पर सोने की रिकॉर्डतोड़ कीमतों ने आम जनता की जेब पर करारा प्रहार किया है।
इसका मुख्य कारण वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट, और घरेलू बाजार में मांग का अत्यधिक बढ़ना बताया जा रहा है। लेकिन इस महंगाई की मार सबसे अधिक मध्यम वर्ग और निम्न आय वर्ग के उपभोक्ताओं पर पड़ी है, जिनके लिए सोने की खरीद अब सिर्फ एक सपना बनकर रह गया है।
सरकार को चाहिए कि वह सोने के आयात शुल्क में कमी करने, जमाखोरों पर सख्त कार्रवाई करने और स्वर्ण बॉन्ड जैसी वैकल्पिक योजनाओं को अधिक आकर्षक बनाने पर ध्यान दे, ताकि बाजार में संतुलन बना रहे। इसके साथ ही उपभोक्ताओं को भी पारंपरिक सोच से हटकर निवेश के अन्य सुरक्षित विकल्पों की ओर बढ़ना चाहिए।
त्योहारों का मकसद खुशी और समृद्धि होता है, न कि आर्थिक बोझ। यह समय है जब नीति-निर्माताओं को हस्तक्षेप कर बाजार को नियंत्रित करने की आवश्यकता है, ताकि दिवाली सभी वर्गों के लिए सच में “रोशनी का पर्व” बन सके



