Editorial : आधुनिक तकनीक
Editorial: Modern Technology

Editorial : वर्तमान समय में तकनीकी उन्नति के प्रयास अपनी चरम सीमा पर हैं, और इसमें दिन प्रतिदिन इजाफा भी होता जा रहा है। आज तकनीकी का इस्तेमाल व्यक्तिगत, व्यावसायिक, प्रशासन और राजकीय सभी कार्यों में बिना किसी हिचकिचाहट के किया जा रहा है।
बड़े कारोबारी संस्थानो लेकिन आप करमें आधुनिक तकनीक का उपयोग स्वचालन के लिये हो रहा हैं, वहीं शासकीय संस्थानों आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल प्रशासन को बेहतर बनाने के लिए किया जा रहा है।आधुनिक तकनीक के बेहतर उपयोग से बने स्मार्ट मीटर से विद्युत इस्तेमाल का बेहतर निरीक्षण संभव हो सका है।
रेलवे, ऑटोमोबाइल्स, उड्डयन इत्यादि में भी तकनीक के इस्तेमाल से ऊर्जा संरक्षण में इजाफा हुआ है। प्रौद्योगिक के इस्तेमाल से ऊर्जा संवहन को बेहतर बनाने का काम इन दिनों युद्व स्तर पर चल रहा है। जैसे आजकल ग्रीन स्विच, स्मार्ट एचवीएसी और स्मार्ट लाइटनिंग तकनीको का भरपूर उपयोग किया जा रहा है।
तकनीकी के सहयोग से बायोगैस, बायोमास, ज्वारीय ऊर्जा, पवन ऊर्जा, दीप्तिमान ऊर्जा, भूतापीय ऊर्जा, सौर ऊर्जा, जल विद्युत, परमाणु ऊर्जा, जैसे अक्षय ऊर्जा के स्त्रोतों को तलाशा और उपयोगी बनाया जा सकता है। अक्षय ऊर्जा के स्त्रोत शने -शने प्रचलित हो रहे हैं क्योंकि अक्षय ऊर्जा बनाने के लिए किसी भी संसाधन का हास नहीं होता। अक्षय ऊर्जा को नवी नवीनीकरण स्रोत भी कहा जाता है क्योंकि यह प्रकृति में निरंतर उत्पन्न हो सकती है।
ग्रीन स्विच जहां सामान्य स्विचों से काफी कम ऊर्जा से संचालित होते हैं, वही जल्दी गर्म भी नहीं होते। स्मार्ट एचवीएसी घरेलू आवास अथवा कार्यालय के रिक्त भाग में विद्युत खपत को सीमित करते हैं, और विद्युत का अनावश्यक उपयोग पर रोकते हैं। स्मार्ट लाइटनिंग गति संवेदको की मदद से ऊर्जा की खपत को काफी हद तक काम कर देते हैं।
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20 साल पहले आमतौर पर 100 वाट के बल्ब उपयोग में ले जाते थे लेकिन अब उनके स्थान पर 2-4-5और 10 वाट की सीएफए का उपयोग बड़े पैमाने पर होने लगा है, , क्यों कि सीएफएल से पर्याप्त प्रकाश तो मिलता ही है और साथ ही बिजली की भी बचत होती है। कूलर, फ्रिज हो अथवा वाशिग मशीन या फिर अन्य कोई घरेलू विद्युत उपकरण सबको प्रौद्योगिकी के उपयोग से उर्जा कुशल बनाया जा रहा है।



