Editorial : छुपे हुए सितारे की चमक

Editorial: The shine of the hidden star

Editorial : भारतीय क्रिकेट में महान प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं रही है, लेकिन कुछ क्षेत्रों की प्रतिभाओं को वह मंच नहीं मिल पाता जिसकी वे वास्तव में हकदार होते हैं। बिहार, जो कभी रणजी ट्रॉफी में एक सशक्त प्रतिनिधि हुआ करता था, पिछले कुछ दशकों से क्रिकेट के नक्शे पर धीरे-धीरे ओझल हो गया। इसके बावजूद, यहां के क्रिकेटरों ने अपनी मेहनत, लगन और जज़्बे से खुद को साबित किया है।

बिहार के समस्तीपुर जिले के छोटे से गाँव मोतीपुर में जन्मे वैभव सूर्यवंशी ने मात्र 14 वर्ष की आयु में क्रिकेट जगत में तहलका मचा दिया है। राजस्थान रॉयल्स की ओर से खेलते हुए, उन्होंने गुजरात टाइटंस के खिलाफ केवल 35 गेंदों में शतक जड़कर न केवल आईपीएल इतिहास में दूसरा सबसे तेज़ शतक बनाया, बल्कि पुरुषों के टी20 क्रिकेट में सबसे कम उम्र में शतक बनाने वाले खिलाड़ी भी बन गए।

वैभव की इस अद्वितीय सफलता के पीछे उनके पिता संजीव सूर्यवंशी का अथक परिश्रम और बलिदान है। स्वयं एक क्रिकेट प्रेमी रहे संजीव ने अपने बेटे के सपने को साकार करने के लिए मुंबई में बाउंसर, सुलभ शौचालय में कर्मचारी जैसे कठिन कार्य किए। उन्होंने वैभव की क्रिकेट प्रशिक्षण के लिए अपनी जमीन तक बेच दी और पटना में प्रशिक्षण के लिए भेजा।

वैभव ने 12 वर्ष की आयु में रणजी ट्रॉफी में बिहार के लिए पदार्पण किया, जिससे वह भारत के सबसे युवा प्रथम श्रेणी क्रिकेटरों में से एक बन गए। उनकी प्रतिभा ने उन्हें भारत की अंडर-19 टीम में स्थान दिलाया, जहाँ उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 58 गेंदों में शतक जड़ा।

वैभव की कहानी न केवल एक युवा खिलाड़ी की सफलता की गाथा है बल्कि यह दर्शाती है कि समर्पण परिश्रम और पारिवारिक समर्थन से कोई भी सपना साकार किया जा सकता है। बिहार जैसे राज्य, जहाँ खेलों के लिए संसाधनों की कमी है, से निकलकर वैभव ने यह सिद्ध कर दिया है कि प्रतिभा किसी सीमाओं की मोहताज नहीं होती।

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वैभव सूर्यवंशी की यह प्रेरणादायक यात्रा अन्य युवाओं को भी अपने सपनों की ओर अग्रसर होने के लिए प्रेरित करेगी और बिहार जैसे राज्यों में खेलों के विकास के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

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