Editorial : ब्लॉकचेन आधारित वोटिंग सिस्टम
Editorial: Blockchain based voting system

भारत देश के नागरिक बेहद आधुनिक चुनाव पद्धति के माध्यम से ग्रामीण, शहरी, जनपदीय, जिला, प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर भली भांति हर प्रकार की सरकारों का गठन लोकतांत्रिक प्रणाली से कर रहे हैं। जब स्वयं को विकासशील और विकसित कहने वाले अनेक राष्ट्र मतपत्र आधारित चुनाव प्रणाली में ही उलझे हुए हैं तब हमारा भारत देश अत्याधुनिक चुनाव प्रक्रिया का इस्तेमाल करते हुए इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन तक का सफर तय कर चुका है।
जब देश के विभिन्न भागों में भिन्न-भिन्न चुनाव रक्त रंजित होने लगे, तब देश के प्रबुद्ध वर्ग को चिंता हुई?। यह विमर्श किए जाने लगे कि ऐसा क्या किया जाए, जिससे चुनाव में रक्तपात ना हो। निर्वाचित होकर भी वही लोग सदन में पहुंचे मतदाता जिन्हें स्वेच्छा से चुनना चाहते हों। तब देश के सामने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन का विकल्प सामने आया। देश ने और देश के चुनाव आयोग ने मतपत्र प्रणाली पर आधारित चुनाव प्रक्रिया अपनाते हुए अनेक प्रतिकूल, बेहद खतरनाक परिणाम भी देखे।
कई दशकों तक येन केन प्रकारेण सत्ता पर काबिज बने रहने अथवा सत्ता पर काबिज होने के लिए मतदान प्रणाली की सात्विकता का हरण किया जाता रहा। मतदान के परिणाम भी पारंपरिक मत पत्रों पर आधारित चुनाव प्रणाली की अपेक्षा बहुत जल्दी प्राप्त हो गए। अपवाद स्वरूप प्राप्त बेहद सीमित आपत्तियों के अलावा कोई उल्लेखनीय खामी सामने नहीं आई, जिसके चलते इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन आधारित चुनाव प्रणाली को बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करने का निर्णय लिया गया।
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बाद में जब विधानसभाओं और लोकसभा चुनाव में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों का प्रयोग शुरू हुआ तो इसकी पारदर्शिता और सात्विकता पर अनेक उंगलियां उठीं। परिणाम स्वरूप आम आदमी तो बार-बार के चुनावों से तंग तो आया ही, चुनावी आचार संहिता के बने रहने से विकास कार्य भी प्रभावित बने रहते हैं। आम आदमी के साथ-साथ विकास की गति को इस मुसीबत से छुटकारा दिलाने के लिए ही देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी एक राष्ट्र एक चुनाव की पुरजोर वकालत कर रहे हैं।



