Editorial : नक्सलवाद मुक्त की दिशा में बड़ा कदम
Editorial: A big step towards Naxalism-free India

Editorial : नक्सलवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति के चलते वर्ष 2025 में अब तक केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा तैयार किए गए आंकड़ों के अनुसार छत्तीसगढ़ में मुठभेड़ों में कम से कम 130 नक्सली मारे गए हैं। इनमें से 110 से ज्यादा बस्तर संभाग में मारे गए जिसमें बीजापुर और कांकेर समेत सात जिले शामिल हैं।
गत 60 वर्षों से देश नक्सलवाद की समस्या से बुरी तरह पीड़ित रहा है। इस दौरान देश में कई सरकारें आई और चली गई मगर नक्सलवाद का नासूर दिनों-दिन बढ़ता ही रहा था। देश के कई प्रदेशों में तो बहुत बड़े हिस्से में नक्सलवादी अपनी समानांतर सरकार तक चलाते थे। नक्सलवाद से सबसे अधिक प्रभावित छह जिलों में अब छत्तीसगढ़ में चार जिले बीजापुर, कांकेर, नारायणपुर और सुकमा झारखंड का पश्चिमी सिंहभूम जिला व महाराष्ट्र का गढ़चिरौली जिला शामिल है।
इसके अतिरिक्त चिंता के जिलों की संख्या जिन्हें गहन संसाधनों और ध्यान की आवश्यकता है 9 से घटकर 6 रह गई है। नक्सलवाद प्रभावित जिलों में उनकी हुकूमत चलती थी। वहां केंद्र व राज्य सरकार का कोई असर नहीं दिखता था। नक्सलियों का फरमान ही अंतिम आदेश होता था जिसे लोग मानने को मजबूर थे।
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गृह मंत्रालय के अनुसार भारत में नक्सलवाद से प्रभावित जिलों की कुल संख्या पहले 38 थी। इनमें से सबसे अधिक प्रभावित जिलों की संख्या अब घटकर 6 हो गई है। साथ ही चिंता के जिलों और अन्य वामपंथी उग्रवाद प्रभावित जिलों की संख्या में भी कमी आई है। देश में नक्सलवाद के खिलाफ केंद्र सरकार के समग्र प्रयासों का असर दिखने लगा है।
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सरकार के प्रयासों का नतीजा है कि अब देश में नक्सल प्रभावित जिलों की संख्या में कमी हो रही है। सरकार ने नक्सलवाद-मुक्त भारत के निर्माण की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। देश में वामपंथी उग्रवाद से अति प्रभावित जिलों की संख्या में कमी आना इस आंदोलन की समाप्ति के संकेत है।



