वेद में निहित है वैश्विक कल्याण : डॉ.पवन शर्मा

केन्द्रीय विश्वविद्यालय जामिया मिल्लिया-इस्लामिया केन्द्रीय विश्वविद्यालय,नई दिल्ली में महर्षि सान्दीपनि राष्ट्रीय वेदविद्याप्रतिष्ठान उज्जयिनी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित त्रिदिवसीय अखिलभारतीय वैदिक संगोष्ठी के दूसरे दिन डॉक्टर पवन शर्मा प्राध्यापक राजकीय मॉडल संस्कृति गनौर सोनीपत ने अपना शोध पत्र प्रस्तुत किया।
शोधपत्र में डॉक्टर पवन शर्मा ने बताया कि मानव जीवन का कोई भी पक्ष ऐसा नहीं है जिसका दर्शन हमें वेद में नहीं होता हो।वेदों में भारत राष्ट्र की महिमागान के साथ ही वैश्विक कल्याण की कामना की गई है।

वर्तमान समय में मैत्री भाव की अत्यधिक आवश्यकता है यदि स्वार्थ से हटकर मानव कल्याण के निमित्त सभी एक दूसरे के प्रति मित्रवत व्यवहार करेंगे तो पारस्परिक मैत्री भाव विश्व में शांति स्थापित करने के लिए एक सुदृढ़ सेतु का काम करेगा।सत्र की अध्यक्षता डॉ रामचंद्र,कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय क्षेत्र ने की।
विशिष्ट व्याख्यान डॉ. कृष्ण मुरारी मणि त्रिपाठी, वाराणसी एवं डॉ. अरुण कुमार मिश्र हरिद्वार ने प्रस्तुत किया। सत्र का संयोजन डॉ. सुरेंद्र सिंह ने किया। इस अवसर पर दीपक शर्मा ने भी अपना शोधपत्र प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय के संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉक्टर जयप्रकाश नारायण उपस्थित रहे।



