डिजिटल प्रौद्योगिकी की मदद से मिले दिव्यांगों को सुलभ आधुनिक शिक्षा : अपूर्व ओम

नई दिल्ली : राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित यूवा हृदय सम्राट अपूर्व ओम ने बताया कि देश मे दिव्यांगों के सामने काफी चुनौतियां हैं और इन्हें डिजिटल प्रौद्योगिकी की मदद से आधुनिक शिक्षा देकर दूर किया जा सकता है।

अंतर्राष्ट्रीय दिव्यांग  कलाकार अपूर्व ओम ने अपने पिता श्री विकाश चंद्र के साथ देश के राष्ट्रपति माननीय श्री रामनाथ कोविंद जी से मुलाकात के दौरान अपनी समस्याओं को सांझा करते हुए उन्होंने कहा कि उनके सामने कई समस्याएं आई, जिस कारण शिक्षा पूरी नहीं हो पाई। डिजिटल माध्यम से शिक्षा मिलने पर यह सतत जारी रहेगी, साथ ही आधुनिक सुविधा इसे सरल बना देगी। साथ ही राष्ट्रपति महोदय से आग्रह किया कि इस कार्य के लिए वह देश मे अपना योगदान देना चाहते है अगर उन्हें मौका मिला तो। राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद अपूर्व ओम ने कहा कि माननीय राष्ट्रपति ने आश्वासन दिया है कि दिव्यांगों को सभी सुविधाएं दी जाएगी और अपूर्व की मांग पर विचार करेंगे। दिव्यांगों को सामान्य बच्चों के साथ पढ़ने का मौका दिया जाएगा। अपूर्व ओम ने कहा कि ऐसा होने पर दिव्यांगों में विश्वास आएगा। हालांकि शारिरिक समस्याएं रहेंगी, जिन्हें दूर करने के लिए सरकार के तरफ से मूक और बधिर दिव्यांगों के लिए कॉकलियर इम्प्लांट की सुविधा को सुलभ बनाया जाए।

अपूर्व ओम ने कहा कि यूनेस्को पेरिस में उनकी एक कलाकृति मॉडल  व्यक्तिगत नाम के साथ रखी हुई है, उक्त आविनव कला मॉडल की पहचान भारत देश के नाम से होनी चाहिए। वहीं राष्ट्रपति को लिखे अपने पत्र में अंतर्राष्ट्रीय और राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित अपूर्व ओम ने कहा कि साल 2018 में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 72वें अध्यक्ष के समक्ष अपने इस विचार को रखे थे और उन्होंने भी इसे लागू करने में मदद का आश्वासन दिया था। इसके अलावा संयुक्त राष्ट्र के महासचिव श्री बान की-मून ने मुलाकात की और मेरे विचारों और कलाकृति की सराहना की। नोबेल पुरस्कार विजेता कोफी अन्नान ने भी मुलाकात कर काम एवम कलाकृति की प्रशंसा की है। अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय के अध्यक्ष रोनी अब्राहम ने मुझे आईसीजे की 70 वीं वर्षगांठ पर आमंत्रित किया, मेरे काम की सराहना की और मेरी कलाकृति अंतरराष्ट्रीय न्यायालय के जजों की पोर्ट्रेट पीस पैलेस की पेंटिंग के साथ को अन्तर्राष्ट्रीय न्यायालय में स्थापित किया गया है। अपूर्व ओम जी को योग में भी महारत हासिल है।

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