राज्य विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को इनोवेटिव विचारों को बढ़ावा देना चाहिए- मनीष सिसोदिया

उपमुख्यमंत्री श्री मनीष सिसोदिया ने विश्वविद्यालयों के कुलपतियों से बात करते हुए कहा कि राज्य के विश्वविद्यालय राज्य सरकार की एक विस्तारित शाखा के रूप में काम कर रहे हैं, अध्ययन कर रहे हैं और समय-समय पर रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं। इससे सरकार को कई जन-केंद्रित निर्णय लेने में मदद मिली है। लेकिन अब उन्हें दुनिया भर की बड़ी समस्याओं के बारे में सोचने और उन पर इनोवेटिव शोध करने की जरूरत है। उन्होंने कुलपतियों को आश्वासन दिया कि केजरीवाल सरकार इनोवेटिव अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है और अगर विश्वविद्यालयों इनोवेटिव विचारों पर ध्यान केंद्रित करती हैं तो सरकार से धन की कोई कमी नहीं होगी।
समीक्षा बैठक में उपस्थित मुख्य सचिव नरेश कुमार ने कहा, “प्राचीन काल में दुनिया भर से लोग नालंदा जैसे विश्वविद्यालयों में अध्ययन और शोध के लिए आते थे। हमें उस परिदृश्य को वापस लाने और अपने विश्वविद्यालयों को विश्वस्तरीय बनाने की जरूरत है। इसके लिए राज्य के विश्वविद्यालयों को अपने अनुसंधान विंग को मजबूत करने और स्वास्थ्य, प्रौद्योगिकी, सामाजिक मुद्दों, शिक्षा, भाषा विज्ञान आदि के क्षेत्र में अनुसंधान के लिए बड़े विचारों पर विचार करने की आवश्यकता है”।
समीक्षा बैठक के दौरान राज्य के विश्वविद्यालयों के वीसी ने अपने शोध कार्य प्रस्तुत किए और उपमुख्यमंत्री को उनके अंतरराष्ट्रीय सहयोग के बारे में जानकारी दी।
-*सोशल रोबोट्स*
आईआईआईटी दिल्ली ऐसे रोबोट विकसित कर रहा है जिनमें भावनात्मक क्वोशन्ट होगा। इसका उद्देश्य अनुकूली और भावनात्मक इंटरैक्टिव क्षमताओं के साथ मशीनों को सशक्त बनाना है। ये सोशल रोबोट उन बच्चों की भावनात्मक मांगों के अनुसार प्रतिक्रिया करते हैं जिन्हें इसे सहायता के लिए सौंपा गया है। ऑटिज्म से पीड़ित बच्चों के साथ इसका परीक्षण किया गया है और इसके प्रभावी परिणाम सामने आए हैं।
-> *ईवी घटकों का भारतीयकरण*
आने वाले वर्षों में ईवी वाहनों का उपयोग बढ़ना तय है, लेकिन ईवी घटकों के लिए चीन या अन्य देशों पर उद्योग की निर्भरता भारत में एक प्रमुख चिंता का विषय है। इस डी.टी.यू. सभी ईवी घटकों जैसे बैटरी, पावर सिस्टम आदि का एक भारतीय संस्करण विकसित कर रहा है।
*बंजर भूखंड से वेटलैन्ड तक*
अम्बेडकर विश्वविद्यालय दिल्ली ने कुछ साल पहले गोपालपुर गांव के धीरपुर इलाके में बंजर भूमि, जिसे पहले सभाओं के लिए इस्तेमाल किया जाता था, को अपने नियंत्रण में लिया था। अब अम्बेडकर विश्वविद्यालय ने इसे एक हरे भरे वेटलैन्ड के रूप में विकसित किया है। इस नव विकसित वेट्लैन्ड में अब 90 से अधिक पेड़ों की प्रजातियां और प्रवासी पक्षियों की 108 से अधिक प्रजातियां रहती हैं।



