“अपनी अंतरात्मा का अनुभव हम 2022 में करें”

सावन कृपाल रूहानी मिशन के अध्यक्ष संत राजिन्दर सिंह जी महाराज ने नववर्ष 2022 के आगमन पर शिकागो, अमेरिका से यू-ट्यूब पर लाइव टेलीकास्ट के ज़रिये संपूर्ण मानव जाति को आशा, शांति और ध्यान-अभ्यास का विश्व-कल्याणकारी संदेश दिया।
नववर्ष 2022 के आगमन पर संपूर्ण विश्व को शुभकामनाएं देते हुए संत राजिन्दर सिंह जी महाराज ने महामारी के इस दुःख भरे समय में शांति को पाने के लिए नववर्ष का अपना आध्यात्मिक स्लोगन जारी किया, “अपनी अंतरात्मा का अनुभव हम 2022 में करें।” नववर्ष के मौके पर उन्होंने सभी मनुष्य जाति के लिए भी प्रार्थना की कि इस नए साल में हम सबका जीवन आंतरिक शांति, खुशी और हर्ष से भरा हो।
इस ऑन लाइन कार्यक्रम की शुरूआत में पूजनीया माता रीटा जी ने गुरुबानी से गुरु अर्जन देव जी के शब्द, “मांगू राम ते इक दान” का गायन किया। उसके पश्चात संत राजिन्दर सिंह जी महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि, “पिछले दो वर्षों से संपूर्ण मानव जाति महामारी के इस मुश्किल दौर से गुज़र रही है। मेरी यह प्रार्थना है कि आने वाले नये साल में हम सबका जीवन बेहतर हो। अपने नववर्ष के संदेश “अपनी अंतरात्मा का अनुभव हम 2022 में करें” के बारे में उन्होंने बताया कि यह स्लोगन सच्ची खुशी को पाने में हमें मददगार होगा। अंतरात्मा के इस अनुभव को हरेक इंसान चाहे वो कोई भी हो, कहीं भी रहता हो या उसकी परिस्थितियाँ चाहें कैसी भी हों, इसके ज़रिये वह अपने जीवन को बेहतर बना सकता है।”
उन्होंने आगे कहा कि अक्सर हम अपने जीवन में शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक समस्याओं का सामना करते हैं और उनको दूर करने की भी कोशिश करते हैं किंतु अगर हम ध्यान से देखें तो हम सिर्फ अपने बाहरी पहलू को ही बदलने की कोशिश करते हैं। हमें यह समझना चाहिए कि हम सभी के पास एक और भी ज़रिया है जिस पर हम ध्यान दे सकते हैं और वह है अपनी अंतरात्मा की तरफ देखना। जो कि कभी न बदलने वाली, सदा-सदा और हमेशा-हमेशा रहने वाली है। यह हमारे जीवन के उतार-चढ़ाव से सबंध नही रखती बल्कि यह हमेशा के आनंद का स्त्रोत है। जिसका अनुभव कर हम हमेशा-हमेशा की खुशी और शांति को पा सकते हैं। हम इस अनुभव को अपने अंदर कैसे पायें?
महाराज जी ने आगे फ़रमाया कि ध्यान-अभ्यास एक ऐसा सरल तरीका है जिसके द्वारा हम अपनी अंतरात्मा से जुड़कर अपने भीतर छुपे खज़ानों को पा सकते हैं। इस अनुभव को पाकर हमें समझ आती है कि सच्ची रोशनी, खुशी और शांति कहीं बाहर नहीं बल्कि हमारे अंदर है। जैसे-जैसे हम अपने अंतर में प्रभु के दिव्य-अनुभव से जुड़ते हैं तो यह हमें अंदर से सदा-सदा की खुशी भर देगा, जिससे कि हमारा पूरा जीवन ही बदल जाएगा।
तो आईये, जब हम नववर्ष 2022 में प्रवेश कर रहे हैं तो हम रोजाना अपना समय ध्यान-अभ्यास में लगाएं और अपनी अंतरात्मा का अनुभव हम 2022 में करें।
संत राजिन्दर सिंह जी महाराज को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान-अभ्यास द्वारा विश्व में आंतरिक और बाह्य शांति स्थापित करने के लिए जाना जाता है।
संत राजिन्दर सिंह जी महाराज विश्व-विख्यात आध्यात्मिक गुरु और विश्व प्रसिद्ध लेखक हैं, जो पिछले 30 वर्षों से पूरे विश्वभर में शांति, एकता और प्रेम का संदेश फैला रहे हैं।
संत राजिन्दर सिंह जी महाराज एक वैज्ञानिक हैं और इनकी शिक्षा भी विज्ञान और उसके निष्कर्षों पर आधारित है। उनके अनुसार अध्यात्म और विज्ञान एक ही सिक्के के दो पहलू हैं और आज उनसे पूरा विश्व आध्यात्मिक लाभ प्राप्त कर रहा है।
संत राजिन्दर सिंह जी महाराज के जीवन और उनके कार्यों का यदि हम निचोड़ निकालें तो वे प्रेम का एक लगातार चलने वाला सफर है जोकि निष्काम सेवा से भरपूर है और हमारे जीवन के असली मकसद जोकि अपने आपको जानना और पिता-परमेश्वर को पाना है, में भी मददगार है। वे जीवन के हरेक क्षेत्र से जुड़े लोगों को ध्यान-अभ्यास की कला सिखाकर उन्हें आत्मिक रूप में पहचानने में मदद करते हैं। उनका संदेश जोकि आशा, प्रेम, मानव एकता और निष्काम सेवा पर आधारित है, आज पूरे विश्व में फैल रहा है।
संत राजिन्दर सिंह जी महाराज अध्यात्म पर सबसे ज्यादा बिकने वाली पुस्तकों के सुप्रसिद्ध लेखक भी हैं, जिन्हें विभिन्न देशों द्वारा पाँच डॉक्टरेट की उपाधियों से भी सम्मानित किया जा चुका है।
सावन कृपाल रूहानी मिशन के आज संपूर्ण विश्व में 3200 से अधिक केन्द्र स्थापित हैं तथा मिशन का साहित्य विश्व की 55 से अधिक भाषाओं में प्रकाशित हो चुका है। इसका मुख्यालय विजय नगर, दिल्ली में है तथा अंतर्राष्ट्रीय मुख्यालय नेपरविले, अमेरिका में स्थित है।
सावन कृपाल रूहानी मिशन



