यशोदा सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल कौशाम्बी में पहली एकमो सुविधा का शुभारम्भ

कमलेश पांडेय/विशेष संवाददाता
गाजियाबाद। जिस तरह से कोरोना के मामलों में वृद्धि हो रही है और प्रशासन फिर से कोविड 19 से निपटने के लिए चाक चौबंद हो रहा है, उस नजरिये से निजी हॉस्पिटल भी अब पीछे नहीं है। प्रशासन द्वारा हाल ही में गाजियाबाद में 5 अस्पतालों को कोविड 19 एवं ओमीक्रॉन से निपटने के लिए चिन्हित किया गया है। जिनमें से एक यशोदा सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल कौशाम्बी है, जहां शुक्रवार को जनरल (सेवानिवृत्त) डॉ वी के सिंह ने उत्तर प्रदेश की पहली एकमो सुविधा का शुभारम्भ किया है।
उत्तर प्रदेश के निजी हॉस्पिटल की पहली एकमो (ईसीएमओ) सुविधा का उद्घाटन मुख्य अतिथि जनरल (सेवानिवृत्त) डॉ वी के सिंह, केंद्रीय राज्य मंत्री, सड़क परिवहन और राजमार्ग और नागरिक उड्डयन ने फीता काट कर किया। गेस्ट ऑफ़ ऑनर राकेश कुमार सिंह, जिलाधिकारी, गाज़ियाबाद एवं यशोदा सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल कौशाम्बी के एमडी डॉ पी एन अरोड़ा भी इस मौके पर उपस्थिति रहे।
जनरल वी के सिंह ने कहा कि कोरोना संक्रमण से ग्रसित मरीजों के लिए जीवनदायनी सिद्ध हो चुकी तकनीक एक्स्ट्रा कोर्पोरियल मेम्ब्रेन ऑक्सीजन (ईसीएमओ) है, जो कोरोना के गंभीर मरीजों के लिए देश के कुछ गिने चुने हॉस्पिटल्स में इस्तेमाल की जा रही है और अब यह सुविधा उत्तर प्रदेश के पहले निजी हॉस्पिटल यशोदा सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल, कौशाम्बी, गाजियाबाद में प्रारम्भ होने जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार भी जल्द ही इस मशीन को लगाने की प्रक्रिया शुरू करेगी।
जनरल वी के सिंह का स्वागत प्रोफेसर डॉ आर के मणि, डायरेक्टर क्लीनिकल सर्विसेज ने किया। जनरल वी के सिंह कहा कि सरकार इस बार कोविड 19 के प्रबंधन में पिछली बार रह गयी कमियों को पूरा करने में पूरे जतन से जुटी हुई है और उत्तर प्रदेश के हर जिले में एक मेडिकल कॉलेज एवं संबद्धित हॉस्पिटल देने की कोशिश की जा रही है, जिससे लोगों को इलाज में सुविधा होगी और देश में जो ज्यादा डॉक्टरों की जरूरत है वो पूरी होगी। उन्होंने कहा कि डॉक्टर की तुलना लोग भगवान से करते हैं क्योंकि आदमी जब बीमार पड़ता है उसको डॉक्टर के अंदर ही भगवान् दिखता है।
जनरल वी के सिंह ने डॉ पी एन अरोड़ा को एवं हॉस्पिटल के समस्त डॉक्टरों, स्टाफ को हृदय से बधाई देते हुए कहा कि पिछले कोविड आपदा में भी हॉस्पिटल का कार्य सराहनीय रहा था और अब नई मशीन और सुविधा के साथ आप सब नई ऊर्जा से कोविड संक्रमित मरीजों की जान बचा सकेंगे।
कार्यक्रम में गाजियाबाद के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ भावतोष शंखधर, एसीएमओ डॉ सुनील कुमार त्यागी, एसीएम/डिप्टी कलेक्टर सुश्री शाल्वी अग्रवाल, हॉस्पिटल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ अनुज अग्रवाल, मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ सुनील डागर एवं वरिष्ठ डॉक्टरों डॉ जे एस लाम्बा, डॉ के के पांडेय, डॉ धीरेन्द्र सिंघानिया, डॉ असित खन्ना एवं एकमो टीम के डॉक्टरों डॉ सचिन माहेश्वरी, सीनियर कंसल्टेंट क्रिटिकल केयर, डॉ आयुष गोयल, सीटीवीएस सर्जन, डॉ सुहास नायर, सीनियर कंसल्टेंट क्रिटिकल केयर एवं डॉ गौरव कंवर, कार्डिएक एनेस्थेटिस्ट ने विशेष रूप से शिरकत की।
डॉ आर के मणि ने बताया कि एकमो मशीन कोविड 19 से बुरी तरह से प्रभावित फेफड़ों के मरीजों के लिए रिकवरी होने तक कृत्रिम फेफड़ों की तरह काम करती है। एकमो प्रबंधन की विशेष ट्रेनिंग ले चुके डॉ सचिन माहेश्वरी ने कहा कि बता दें, ईसीएमओ पर मरीज को तभी रखते हैं जब दिल, फेफड़े ठीक से काम नहीं करते हैं और वेंटीलेटर का भी फायदा नहीं होता। इससे मरीज के शरीर में ऑक्सीजन पहुंचाया जाता है।
डॉ सुहास नायर ने कहा कि एक्सट्राकॉर्पोरियल मेंब्रेन ऑक्सीजिनेशन (ईसीएमओ) एक एडवांस तकनीक की यांत्रिक जीवन दायनी (लाइफ सपोर्ट) मशीन है। इस मशीन से अशुद्ध रक्त को शुद्ध (ऑक्सीजनटेड) करके फिर से शरीर में वापस किया जाता है, जिससे रोगी के क्षतिग्रस्त अंग या दिल की गति ठीक हो जाती है। वहीं, डॉ गौरव कँवर ने बताया कि ईसीएमओ दो प्रकार के होते हैं: वेनोएक्टोरियल, जो हृदय और फेफड़ों को सपोर्ट करती है। वेनोवेनॉस, जो केवल फेफड़ों के लिए ऑक्सीकरण सपोर्ट करती है। वहीं, हृदय रोग सर्जन डॉ आयुष गोयल ने बताया कि ईसीएमओ फेफड़ों के प्रत्यारोपण सहित सर्जरी से पहले और बाद में गंभीर हृदय और श्वसन विफलता वाले रोगियों के लिए एक सेतु का काम करता है।

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