जीवन में संतुलन और विश्वास

इस दुनिया में आज लगभग 7 अरब से ज्यादा लोग रहते हैं। इनमें से अधिकतर लोग इस भौतिक संसार की इच्छाओं को पूरा करते हुए अपने आत्मिक पहलू की ओर ध्यान दिए बगैर ही अपना जीवन गुज़ार देते हैं। कुछ ही लोग हैं जो ज़िंदगी के असली उद्देश्य तलाशते हैं। वे एक ऐसे रास्ते की खोज करते हैं जिससे कि वे अपने जीवन का उद्देश्य और पिता-परमेश्वर के साथ अपने संबंध के बारे में जान सकें।

जब हम ऐसे लोगां को देखते हैं जो पिता-परमेश्वर को जानना चाहते हैं तो जिन लोगों का ध्यान दुनिया पर केन्द्रित होता है, उन्हें ऐसा लगता है कि वे अपने ही समाज और संस्कृति से दूर हो रहे हैं। जबकि ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। ऐसे लोग सिर्फ अपने जीवन के ध्येय के प्रति पूरी तरह समर्पित होते हैं। जो लोग परमात्मा की तलाश में हैं, उनमें से कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो परमात्मा की खोज तो बड़े ही जोश और जज़्बे के साथ शुरू करते हैं लेकिन धीरे-धीरे उनकी दिलचस्पी कम हो जाती है और वह अपने लक्ष्य तक पहुँच नहीं पाते।

अगर हम अपने जीवन पर एक नज़र डालकर देखें तो हम हमेशा अपना जीवन यह सोचकर व्यतीत करते हैं कि दूसरे व्यक्ति हमारे बारे में क्या सोचते हैं या वे हमारी बातों और हमारे कार्यों को किस प्रकार समझते हैं? हम अपना जीवन दूसरों के नज़रिये को ध्यान में रखकर जीते हैं। इसके अलावा हम दूसरों की निंदा भी करते हैं। हमारी ओर से की गई आलोचना, हमारी तरफ और ज्यादा आलोचना लेकर आती है और हमारी और से की गई प्रशंसा हमारी तरफ और अधिक प्रशंसा लेकर आती है। अंत में हम पाते हैं कि इस तरह का जीवन व्यतीत कर हम कुछ भी हासिल नहीं कर पाते।

इसके बजाय हमें एक संतुलित जीवन जीना चाहिए। हमें एक ऐसा जीवन जीने की ज़रूरत है जिसमें हम दूसरों के प्रति सदैव अच्छाई ही दर्शाएं। हमें ऐसा जीवन जीने की ज़रूरत है जिसमें पिता-परमेश्वर पर हमारा विश्वास इतना मजबूत हो कि कोई भी हमारी आस्था को तोड़ न सके। हमें एक ऐसी ज़िंदगी जीनी है जिसमें कि हम किसी से भयभीत न हों। हमारे अंदर इतना विश्वास होना चाहिए कि पिता-परमेश्वर सदा हमारे साथ हैं और वे हमेशा हमारी संभाल कर रहे हैं। हमें ऐसा जीवन जीना चाहिए जिसमें हम सबको एक नज़रिये से देखें, फिर चाहे बाहरी तौर पर वे हमें सोने की तरह लगें या लोहे की तरह दिखें। जब हम हर एक में पिता-परमेश्वर की ज्योति को देखेंगें, सिर्फ तभी हम अपने जीवन के लक्ष्य जोकि अपने आपको जानना और पिता-परमेश्वर को पाना है, को हासिल कर पाएंगे।

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