नई शिक्षा नीति और तकनीक से ही होगा नए भारत का निर्माण: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धमेंद्र प्रधान

नई दिल्‍ली। मीडिया एक प्रहरी है और भारत के जीवंत लोकतंत्र में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। ओडिशा के राज्यपाल प्रो. गणेशी लाल ने तीन दिवसीय पांचवें राष्‍ट्रीय मीडिया कॉन्‍क्‍लेव के समापन के मौके पर कहा। इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया स्टडीज (आईएमएस) द्वारा आयोजित और मीडिया एंड एंटरटेनमेंट स्किल्स काउंसिल (एमईएससी) के सहयोग सेआयोजित इसकॉन्क्लेव में छह सेशन का आयोजन किया गया था। जिसमें 100 से अधिक शिक्षाविदों, प्रोफेशनलऔर विद्वानों ने हिस्‍सा लिया। 70 से अधिक प्रतिभागियों ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए। कार्यक्रम का उद्घाटन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने किया था।

केंद्रीय मंत्री धमेंद्र प्रधान ने श्री हरेकृष्ण महताब को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की और शिक्षा प्रणाली और ओडिशा राज्य में उनके महान योगदान के लिए उनकी सराहना की। उन्होंने अपने विचार साझा किए कि कैसे प्रौद्योगिकी ने दुनिया भर में संचार करना आसान बना दिया है । उन्‍होंने नई शिक्षा नीति- 2020 और मीडिया और डिजिटल प्रौद्योगिकी के महत्‍व पर जोर दिया। नए भारत के निर्माण की बात कही।

एमईएससी के अध्यक्ष और प्रसिद्ध भारतीय फिल्म निर्देशक श्री सुभाष घई ने नई शिक्षा नीति- 2020 पर अपने विचार साझा किए और बताया कि कैसे नई सोच न केवल छात्रों के लिए बल्कि प्रशिक्षकों के लिए भी परिवर्तनकारी बदलाव ला सकती है। उन्होंने वाईसीएमओयू और एमजीएम विश्वविद्यालय, महाराष्ट्र के कुलपति प्रो डॉ. सुधीर गावणे, भारतीय विश्वविद्यालयों के संघ के महासचिव श्रीमती पंकज मित्तल समेत अन्‍य प्रोफेसर की उपस्थिति में नई शिक्षा नीति- 2020 को बेहतर लागू करने के लिए सुझाव दिया।

बतौर मुख्‍य अतिथि मौजूद राज्‍यपाल प्रो. गणेशी ने कहा कि सरकार को आम लोगों तक सूचना देने के लिए सभी संचार माध्‍यम चाहे रेडियो, सोशल मीडिया या ऑनलाइन मीडिया पर आम बोल चाल की भाषा में सूचनाएं देनी चाहिए। साथ ही उन्होंने मीडिया से फर्जी खबरों पर अंकुश लगाने का आह्वान किया। प्रसिद्ध पत्रकार और पीपुल्स आर्काइव ऑफ रूरल इंडिया (PARI) के संस्थापक संपादक पी. साईनाथ ने देश में मीडिया की स्थिति और समय के साथ यह कैसे बदल गया है, के बारे में बात की। उन्होंने कहा कि काउंटी के हर क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन, कृषि संकट जैसे विभिन्न सामाजिक मुद्दों का सामना करने के बावजूद, मीडिया इसके बारे में रिपोर्ट नहीं करता है। तीन दिवसीय इस कॉन्‍क्‍लेव में संचार विशेषज्ञ प्रो. विनोद पवारला, प्रो. मोहम्मद शाहिद उल्लाह, डॉ. सुधांशु दहल, डॉ. कंचन के मलिक और एन.ए. शाह अंसारी ने अपने-अपने सेशन में ‘सामुदायिक मीडिया, नागरिक समाज और सामाजिक अधिकारिता’ पर विचार रखे।

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