उद्यमिता की एक मिसाल बन चुके हैं सुशील कुमार सिंह

कमलेश पांडेय/विशेष संवाददाता, नई दिल्ली। यदि आप व्यक्तिगत या पारिवारिक कारणों वश अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़ने को अभिशप्त होते हैं तो भी चिंता करने की कोई बात नहीं! क्योंकि यूपी में उद्यमिता की एक मिसाल पेश कर चुके जौनपुर निवासी सुशील कुमार सिंह का जीवन-दर्शन इस बात की साक्षी है कि किसी डिग्री के बिना भी देश-विदेश यानी भारत से अमेरिका तक अपना कारोबार फैलाया जा सकता है। बस लगन, हुनर और अपनी धुन के पक्का होना जरूरी है, भले ही स्वजन, परिजन या शेष दुनिया कुछ भी कहे।
डासना नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी मनोज कुमार मिश्रा के बैचमेट रहे आईटी पेशेवर सुशील कुमार सिंह ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय में बीएससी की पढ़ाई छोड़कर जब दिलवालों के शहर दिल्ली कूच करने का निर्णय लिया और दक्षिणी दिल्ली के बदरपुर बॉर्डर में अपनी बहन के यहां रहकर दूरसंचार कम्पनी भारती एयरटेल के एक कॉल सेंटर से अपनी नौकरी की शुरुआत की। उसके बाद उन्होंने कभी भी पीछे मुड़कर नहीं देखा।
# बिजनेसमैन को ईमानदार होना चाहिए और इमोशनल इंटेलीजेंस में दक्ष: सुशील
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आदि के सामाजिक व पेशेवर दर्शन से प्रभावित सुशील कुमार सिंह ने अपनी स्किल्स और कैलिवर के बल पर उन्होंने न केवल नौकरियां बदली, बल्कि बहुत ही कम दिनों में अमेरिकी शहरों की तर्ज पर बसाए गए शहर नोएडा महानगर से लेकर अमेरिकी शहरों तक में अपने आईटी पेशे का काम फैला दिया। आज वह एसएसआर टेकविजन प्राइवेट लिमिटेड, साइना आईटी सिस्टम प्राइवेट लिमिटेड और दीबाको क्लोथिंग नामक तीन तीन कम्पनियों के नीति नियंता हैं और लगभग 250 कर्मचारियों को गुणवत्ता परक तरीके से डील कर रहे हैं।
खास बात यह कि कोरोना काल में उन्होंने अपने एक भी कर्मचारी को निष्काषित नहीं किया और न ही उनकी सैलरी में कोई कटौती की। इसके लिए ब्रांड्स इम्पैक्ट ने सुशील कुमार सिंह को मोस्ट इंस्पायरिंग एंटरप्रेन्योर ऑफ द ईयर 2021 का राइट चॉइस अवार्ड प्रदान किया है, जो किसी के लिए भी गौरव की बात हो सकती है।
एक अनौपचारिक मुलाकात में उन्होंने बताया कि बिजनेसमैन को ईमानदार होना चाहिए। नीयत स्पष्ट और विजन क्लियर होना चाहिए। साफ सुथरी छवि और फिनांसियल ग्रोथ से आपको अपना मकसद मिल पायेगा। इसलिए हर मोर्चे पर सजग रहें। इमोशनल इंटेलीजेंस विकसित करें, ताकि अपनी टीम को नियंत्रित रखते हुए उन्हें प्रोग्रेसिव बनाये रख सकें। हिंदी पट्टी यानी यूपी-बिहार, एमपी-राजस्थान आदि में उद्यमियों को सफल बनने का गुर समझाते हुए उन्होंने कहा कि किसी भी उद्यमी में हाई आई क्यू लेवल होना चाहिए। ताकि हरेक स्थिति-परिस्थिति में कोई भी डील आप कम्पनी व कर्मचारियों के भावी हित में कर पाएं। स्वस्थ कार्यप्रणाली इसकी पहली व अंतिम शर्त भी है।
# जानिए, कौन हैं सुशील कुमार सिंह और उन्हें क्यों जानना चाहिए नई पीढ़ी को
जौनपुर जनपद अंतर्गत मड़ियाहूं तहसील के कटौना ग्राम निवासी एक सफल उद्यमी सुशील कुमार सिंह का जन्म 3 मई 1981 को हुआ। उनकी प्रारम्भिक और माध्यमिक शिक्षा दीक्षा मुंबई महानगरपालिका के डोम्बिवली और जोधले के स्कूलों में हुई। क्योंकि उनके पिताजी एक सुरक्षा गार्ड के रूप में वहीं पदस्थापित थे। बाद में वह स्नातक विज्ञान की शिक्षा हासिल करने के लिए इलाहाबाद चले आये और इलाहाबाद विश्वविद्यालय में दाखिला लिया। इस तीन वर्षीय कोर्स के अंतिम वर्ष की परीक्षा दिए बिना वह नौकरी की तलाश में दिल्ली चले आये। कम्प्यूटर हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर का अच्छा ज्ञान होने के चलते दिल्ली में उन्होंने अपने लिए सहज ही एक जगह बना ली।
दिल्ली-एनसीआर में उन्होंने अथक परिश्रम के बल पर अपने आपको न केवल स्थापित किया, बल्कि अन्य उद्यमियों के लिए भी आज वह एक बड़े प्रेरणा स्रोत बन चुके हैं। उनका कार्यालय नोएडा सेक्टर 64 में है, जबकि नोएडा सेक्टर 119 स्थित अपने फ्लैट में वह रहते हैं। जिम व कुकिंग उन्हें बेहद पसंद है। अंग्रेजी फिल्मों को देखने के साथ-साथ पुस्तकें पढ़ने का भी उन्हें शौक है। वे गजब की मिमिक्री भी करते हैं। प्रतिष्ठित पत्रिका फोर्ब्स ने भी उनकी उद्यमिता भावना को सराहा है।
सुशील कुमार सिंह की शादी मई 2014 में सरिता रावत सिंह के साथ हुई, जो अब एक महिला उद्यमी हैं। उनकी इकलौती बेटी शिवाया सिंह है। उनके सहपाठी और अब लखनऊ सचिवालय में पदस्थापित व्यंग्यकार दिलीप कुमार के द्वारा इलाहाबाद रेलवे स्टेशन पर बोले गए वह प्रेरणादाई शब्द उन्हें आज भी याद है, जिसमें उन्होंने कहा था कि दिल्ली जाओ, कुछ करो, मुझे उम्मीद है कि कुछ बढ़िया करोगे।
वाकई भारती एयरटेल से शुरू हुआ उनके करियर का सफर कण्वरजेज, आईकोर, एजेज आदि में जीवन के कटु-मधु अनुभव दिलाता हुआ आज उन्हें अपने स्वामित्व वाली कम्पनियों के उस मुकाम पर लाकर खड़ा कर दिया है जहां पहुंचकर किसी को भी गर्व हो सकता है। इतनी ऊंचाई हासिल करने के बाद भी उनका मन अपने गांव में बसता है। वहां पर वह 51 फीट ऊंची पवनपुत्र हनुमानजी की मूर्ति बनवा रहे हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जिस आत्मनिर्भर भारत की बात करते हैं और युवाओं में जिन उद्यमिता को विकसित करने का आह्वान करते हैं, उसके परिप्रेक्ष्य में आउटसोर्सिंग, आईटी और क्लोदिंग उद्यमी सुशील कुमार सिंह के जीवन संघर्षों और उपलब्धियों की चर्चा नई पीढ़ी की सोच बदल दे तो हैरत की बात नहीं होगी।
फोटोकैप्शन:- आउटसोर्सिंग, आईटी व क्लोदिंग इंडस्ट्री के सफल उद्यमी सुशील कुमार सिंह।



