Editorial : मतदान के लिए जागरूकता
Editorial: Awareness for voting

Editorial : लोकतंत्र का सबसे महत्वपूर्ण पहलू चुनाव है, लोकतंत्र को बनाये रखने के लिए सभी मतदाताओं की सहभागिता को सुनिश्चित करना जरूरी है। इसके लिये चुनाव आयोग का आरईवीएम के प्रयोग का प्रस्ताव एक सराहनीय एवं जागरूक लोकतंत्र की निशानी है।
क्योंकि आजादी के बाद से ही जितने भी चुनाव हुए है, उनमें लगभग आधे मतदाता अपने मत का उपयोग अनेक कारणों नहीं कर पा रहे हैं, ऐसा हर चुनाव में होता आया है। इसलिए लंबे समय से मांग उठती रही थी कि ऐसे लोगों के लिए मतदान का कोई व्यावहारिक एवं तकनीकी उपाय निकाला जाना चाहिए।
पिछले कुछ वर्षों में मतदान के अधिकार के बारे में जागरूकता बढ़ाने और लोकतांत्रिक मूल्यों को बढ़ावा देने में चुनाव आयोग महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। चुनाव आयोग इस मंच का उपयोग स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों में योगदान देने वाले अधिकारियों, हितधारकों और संगठनों के प्रयासों को मान्यता देने के लिए भी करता है।
भारतीय लोकतंत्र दुनिया का विशालतम लोकतंत्र है और समय के साथ परिपक्व भी हुआ है। बावजूद इसके लोकतंत्र अनेक विसंगतियों एवं विषमताओं का भी शिकार है। मुख्यत: चुनाव प्रक्रिया में अनेक छिद्र हैं, सबसे बड़े लोकतंत्र का सबसे बड़ा छिद्र चुनावों की निष्पक्षता एवं पारदर्शिता को लेकर है।
लोकतंत्र में कोई भी सरकार आम जनता की सरकार ही होती है और सरकारी खजाने में जो भी धन जमा होता है वह जनता से वसूले गये शुल्क या टैक्स अथवा राजस्व का ही होता है। राजशाही के विपरीत लोकतन्त्र में जनता के पास ही उसके एक वोट की ताकत के भरोसे सरकार बनाने की चाबी रहती है।
जनता की गाढी कमाई की बर्बादी को रोकने, बार-बार चुनाव प्रक्रिया के होने जनता को होने वाली परेशानी और प्रशासनिक कार्य में होने वाली असुविधाओं को रोकने के लिए चुनाव एक साथ कराने की व्यवस्था निश्चित रूप से लोकतंत्र को एक नई उष्मा एवं नया परिवेश देगी। यदि इसके लिये कोई सर्वमान्य रास्ता निकलता है तो सचमुच यह देश, समाज और लोकतंत्र के हित में होगा।



