Editorial : अमेठी-रायबरेली को लेकर मंथन

Editorial: Brainstorming regarding Amethi-Rae Bareli

Editorial : वर्तमान समय में जो स्थिति है वह कांग्रेस पार्टी के लिए बेहद चुनौती पूर्ण है। लेकिन अमेठी और रायबरेली के लिए यह स्थित गाँधी परिवार के लिए चुनौती पूर्ण नहीं हैं। राहुल और प्रियंका गांधी को निश्चित रूप से अमेठी और रायबरेली से चुनाव लड़ना चाहिए। कांग्रेस के लिए हार जीत के मायने से कहीं अधिक महत्वपूर्ण अमेठी और रायबरेली की जनता का सम्मान है। क्योंकि दोनों अहम सीट गांधी परिवार की परंपरागत विरासत रही है। यह अलग बात है कि अमेठी से भजपा की स्मृति ईरानी चुनाव जीतने में सफल रहीं हैं।

कहा यह जा रहा है कि यहाँ पांचवें चरण में वोटिंग होगी इसलिए पर्याप्त समय है। लेकिन सच यह है कि अभी राहुल गाँधी एवं प्रियंका खुद तय नहीं कर पाए हैं कि उन्हें चुनावी मैदान में उतरना है या नहीं।

प्रधानमंत्री मोदी को अच्छी तरह मालूम है कि भाजपा का विकल्प कांग्रेस ही है। कांग्रेस राजनीति के संक्रमण काल से गुजर रही है लेकिन गांधी परिवार की अहमियत कांग्रेस और देश के लिए उतनी ही अहम है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने सियासी हमले के लिए सीधे तौर पर कांग्रेस को चुनते हैं।

राहुल गांधी को अमेठी की जनता ने भरपूर स्नेह और सम्मान दिया है। 2004 में राहुल गांधी पहली बार अमेठी से चुनाव लड़े और तीन बार सांसद चुने गए। 2019 में उन्होंने वायानाड और अमेठी दोनों से चुनाव लड़ा, लेकिन अमेठी में स्मृति ईरानी के सामने उन्हें पराजित होना पड़ा। हालांकि वायानाड की जनता ने उन्हें सांसद बनाकर दिल्ली भेजा। इस हालात में राहुल गांधी के सामने उत्तर और दक्षिण का पेंच फंसा है।

राहुल और प्रियंका गांधी को लगता है कि अगर भाई-बहन चुनावी जंग में अमेठी और रायबरेली से उतरते हैं तो पार्टी के प्रचार की कमान वे नहीं संभाल पाएंगे। जिसकी वजह से पार्टी को नुकसान हो सकता है। क्योंकि दोनों ही पार्टी के स्टार प्रचारक है।

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