Clean Environment : अपने आसपास के वातावरण को स्वच्छ रखना हम सबकी नैतिक जिम्मेदारी है

Clean Environment : एक स्वस्थ जीवन जीने के लिए स्वच्छता बहुत जरूरी है। स्वच्छ माहौल में इंसान ताजगी और शांति महसूस करता है। हम जब मंदिर जाते हैं, तो वहां पर हमें बहुत शांति का अहसास होता है क्योंकि मंदिर के आसपास का वातावरण शुद्ध और पवित्र होता है, वहां चारों तरफ स्वच्छता होती है।
विद्यार्थी जीवन में ज्यादातर समय विद्यालय में व्यतीत होता है, ऐसे में विद्यालय का भी स्वच्छ होना बहुत जरूरी है। क्योंकि विद्यालय भी तो मंदिर के समान ही है, यह ज्ञान का मंदिर है, मां सरस्वती का मंदिर है। ऐसे में जब हम मंदिरों की सफाई रखते हैं, तो विद्यालय की भी सफाई रखनी चाहिए।
विद्यालय साफ रहेगा तभी बच्चों का पढ़ाई में मन लगेगा और बच्चे स्वस्थ रहेंगे। इसके लिए विद्यालय के शिक्षकों का कर्तव्य है कि वह बच्चों को हमेशा से ही स्वच्छता के महत्व को बताएं ताकि बच्चे स्वच्छता के प्रति सजग रहें और विद्यालय को स्वच्छ रखें।
इसके साथ साथ अध्यापकों का भी कर्त्तव्य बनता है कि वो जिस विद्यालय में अध्यापन कार्य करतें हैं वह विद्या का मंदिर भी स्वच्छ रहे यह तभी संभव हो सकता है जब एक अध्यापक स्वयं पुरजोर इसके लिए प्रयास करें और विद्यार्थियों को भी प्रेरित करें।निजीकरण के चलते शिक्षा व्यवस्था पहले से कहीं अधिक गैर-बराबरी और भेदभाव की बुनियाद पर खड़ी हो गई है। जबकि, सबको समतामूलक शिक्षा उपलब्ध कराना संवैधानिक तकाजा था।
विडंबना है कि जितनी परतों में समाज बंटा हुआ था उतनी ही परतों में बंटी शिक्षा व्यवस्था खड़ी करके शिक्षा की परिवर्तनकामी धार कुंद कर दी गई।वैश्वीकरण ने सरकारी स्कूलों को ध्वस्त करके शिक्षा का बाजारीकरण तेज कर दिया गया।
आज की प्राइवेट शिक्षा वैश्विक पूंजी के लिए कुशल लेकिन गुलाम मजदूर तैयार कर रही है, न कि लोकतांत्रिक नागरिक।ऐसे में ‘सरकारी स्कूल’ नाम से प्रारंभ इस श्रृंखला में उम्मीद जगाती कहानियां आएंगी पाठ्य पुस्तकों से परिवर्तन के पाठ पढ़ाने वाले देश के कई सरकारी शिक्षक पीढ़ी-दर-पीढ़ी स्कूलों के माध्यम से शिक्षा के क्षेत्र में साइलेंट चेंज लाते रहे हैं। इस श्रृंखला में हरियाणा के कुछ शिक्षक हैं जिन्होंने हाल के वर्षों में अपने अध्यापन कार्य के बल पर छात्रों के भविष्य को उज्ज्वल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
प्रिय पाठकों आज मैं ऐसे अध्यापकों के बारे में आपको अवगत कराना चाहता हूं जो अध्यापन कार्य में तो अव्वल है ही इसके साथ-साथ विद्यालय में अन्य गतिविधियों में भी निरंतर इमानदारी और मेहनत द्वारा विद्यालय प्रांगण को साफ स्वच्छ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। जैसा कि आजकल विद्यालयों में परीक्षाओं का दौर चला हुआ है।
इस अवसर पर जो समय रहता है उसका भरपूर सदुपयोग करने के लिए राजकीय मॉडल संस्कृति वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय गन्नौर सोनीपत में कार्यरत मुनीष कुमार अंग्रेजी प्राध्यापक, मनोज कुमार हिंदी प्राध्यापक, डॉ. पवन शर्मा संस्कृत प्राध्यापक व संदीप खत्री वोकेशनल प्राध्यापक चारों अध्यापक सुबह एक से दो घण्टें तक विद्यालय विद्यालय प्रांगण की स्वच्छता के लिए भरपूर सहयोग कर रहे हैं हालांकि विद्यालय में स्वीपर भी है इसके बावजूद भी ये प्राध्यापक विद्यालय की सफाई में योगदान दे रहें हैं।
अभी हाल ही में बारिश की वजह से विद्यालय की सभी कक्षा की छतों पर वृक्ष के पत्ते गिरे होने की वजह से पानी रुक गया था, तो इन अध्यापकों ने सभी छतों की सफाई की। विद्यालय प्रांगण में पेड़ पौधों की कटिंग की उन्हें निरंतर पानी देना आदि कार्य अपनी श्रद्धा से निरंतर करते रहते हैं। उनका कहना है कि कोई भी कार्य छोटा बड़ा नहीं होता यदि हम उसे मन से करें तो हमें आत्मिक संतुष्टि का अनुभव होता है। हम जहां रहते हैं, जिस कार्यस्थल पर रहते हैं, हमें उसकी स्वच्छता के लिए तथा उसे आगे बढ़ाने के लिए अपना शत प्रतिशत देना चाहिए और मन लगाकर उसे आगे बढ़ने का प्रयास करना चाहिए।
स्वच्छता हमारे लिए एक बड़ी चुनौती
उपर्युक्त सन्दर्भ में मेरा मानना है कि वर्तमान समय में स्वच्छता हमारे लिए एक बड़ी चुनौती है। यह समय भारतवर्ष के लिए बदलाव का समय है, बदलाव के इस दौर में यदि हम स्वच्छता के क्षेत्र में पीछे रह गए तो आर्थिक उन्नति का कोई महत्व नहीं रह जाएगा। साथ ही हमें इसे एक बड़े स्तर पर भी देखने की जरूरत है ताकि हमारे पर्यावरण को प्रदूषित होने से बचाया जा सके।
सफाई कर्मचारियों की ही जिम्मेदारी नहीं
साफ-सफाई केवल सफाई कर्मचारियों की ही जिम्मेदारी नहीं है, यह हम सभी नागरिकों की जिम्मेदारी है कि हम अपने शहर और गांवों को साफ और सुरक्षित रखें। हमें यह नजरिया बदलना होगा और मैं जानता हूं कि इसे केवल एक अभियान बनाने से कुछ नहीं होगा। पुरानी आदतों को बदलने में समय लगेगा लेकिन यह इतना मुश्किल काम भी नहीं है।
युवाओं को स्वच्छता अभियान को लेकर बड़ा परिवर्तन लाने की आवश्यकता है। स्वच्छ भारत अभियान को सफल बनाने के लिये देश-प्रदेश का युवा निम्न तरह की गतिविधियों के माध्यम से अपना महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है :
● पर्यावरण को बचाने के लिये पेड़-पौधों और वृक्षारोपण करेंगे।
● शौचालय का प्रयोग करने के लिए लोगों में जागरूकता फैलायें।
● अपने आस-पास रखे कूड़ेदान का प्रयोग करने के लिये लोगों को बतायें।
● स्वच्छ पेयजल आपूर्ति के लिये लोगों को जागरूक बनाने का प्रयास करेंगे।
● गंदगी नहीं फैलाएंगे और ऐसा करने वालों को विनम्रता पूर्वक रोकने का प्रयास करेंगे।
● सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों को स्वच्छता बनाये रखने संबंधी अभियान चलाएंगे।
● पान, गुटका और तम्बाकू जैसे उत्पादों का सेवन करने वालों को स्वच्छता के प्रति प्रेरित करेंगे।
● सरकारी संस्थानों, स्कूलों और घरों में स्वच्छता बनाये रखने के लिए लोगों को शिक्षित बनाएंगे।
● स्वच्छता के लिए नालियों की गंदगी, नदियों के आस-पास जमे कूड़े-कर्कट, सड़कों की सफाई करेंगे।
● संगीत, नाटक और स्वच्छता पखवाड़ा अभियान के जरिये लोगों को स्वच्छता के प्रति जिम्मेदार बनाएंगे।
अस्वच्छ भारत की तस्वीरें अक्सर भारतीयों के लिए शर्मिंदगी की वजह बन जाती हैं, इसलिए स्वच्छ भारत के निर्माण एवं देश की छवि को सुधारने का यह सही समय एवं अवसर है। यह अभियान न केवल नागरिकों को स्वच्छता संबंधी आदतें अपनाने बल्कि हमारे देश की छवि को इस अभियान के माध्यम से स्वच्छ बनाने में भी मदद करेगी। आज हमें जरूरत है प्रण लेने की “एक साथ मिलकर कार्य करें और सबके लिए प्रेरणा का स्रोत बनें”।
डॉ.पवन शर्मा



