‘वागले की दुनिया’ एक एपिसोड के जरिये कन्या भ्रूण हत्या पर रोशनी डालेगा

दर्शकों का भरपूर मनोरंजन करने के अलावा वागले परिवार ने हमेशा ही विभिन्न सामाजिक मुद्दों के बारे में जागरूकता फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अपने इसी स्वभाव के अनुरूप, वागले परिवार एक बार फिर एक और महत्वपूर्ण मुद्दे को लेकर आया है, जो कन्या भ्रूण हत्या एवं भ्रूण हत्या की सामाजिक बुराई के बारे में है। हमने देखा है कि वंदना की चम्पा मौसी और उनकी बहू कीर्ति अपने गृहनगर से वागले परिवार में रहने के लिये आते हैं। उनका कहना है कि वो चम्पा मौसी के आंखों के ऑपरेशन के लिये आये हैं। हालांकि, सच्चाई यह है कि कीर्ति प्रेगनेंट है और ऐसा लग रहा है कि उसके पेट में लड़की है। चम्मा मौसी और उनका परिवार इस बात से निराश हैं और इसलिये वो कीर्ति का गर्भपात करवाने के लिये उसे शहर लेकर आये हैं। इस बीच, कीर्ति अपने अजन्मे बच्चे को बचाने की हर संभव कोशिश कर रही है।
वंदना (परिवा प्रणति) और राजेश (सुमीत राघवन) को सच्चाई पता चल जाती है और वंदना यह सोचकर हैरान है कि जिस महिला को उसने अपनी मां के जैसा माना, वह भ्रूण हत्या जैसा एक भयानक अपराध करने जा रही है। एक बेटी के पैरेंट्स होने के नाते, वंदना और राजेश कीर्ति के गर्भ में पल रहे इस मासूम बच्चे की जिंदगी बचाने के लिये लड़ने का फैसला करते हैं। वे चम्पा मौसी को यह सबक सिखाने कि एक मासूम और अजन्मे बच्चे की हत्या करना सबसे घृणित अपराध है, के लिए कीर्ति के साथ हाथ मिलाते हैं। अपने ठेठ वागले अंदाज में, वंदना और राजेश चम्पा मौसी को समझाते हैं कि बेटी का जन्म लेना कोई श्राप नहीं, बल्कि किसी भी परिवार के लिये एक वरदान है।
क्या वे चम्पा मौसी के विचारों को बदलने में सफल होंगेᣛ? क्या कीर्ति और वागले परिवार मिलकर कीर्ति के अजन्मे बच्चे को बचा पाएंगेᣛ? इन सभी सवालों के जवाब दर्शकों को आने वाले दिनों में मिलेंगे। वागले परिवार ने चीजों को हमेशा अपने ढंग से किया है। मानवता की भलाई और सभी के लिये समानता पर अपने अटल विश्वास, पारिवारिक मूल्यों पर ध्यान देने और ऐसे लोगों की आवाज बनने, जिनकी कोई आवाज नहीं है, जैसी अच्छाइयों के कारण वागले परिवार हमेशा कठिन मुद्दों से निपटने में मार्गदर्शन पाता है। इस सीरीज ने हमेशा महत्वपूर्ण मुद्दों और समाज की बुराइयों को सम्बोधित करने के लिये आगे कदम बढ़ाया है और साथ ही महत्वपूर्ण संदेश देते हुए दर्शकों का मनोरंजन सुनिश्चित किया है। यह पारिवारिक हास्य और बड़े दिल वाला ब्राण्ड ही है, जिसके कारण शो अपने प्रशंसकों का चहेता बना हुआ है।
इस विषय के बारे में राजेश वागले की भूमिका निभा रहे सुमीत राघवन ने कहा, “एक बेटी का पिता होने के नाते यह विषय मेरे दिल के करीब है। मेरी बच्ची मेरी जिन्दगी की रोशनी है और मैं उसके बिना अपने जीवन की कल्पना नहीं कर सकता। बेटी होना एक वरदान है और मुझे समझ नहीं आता है कि लोग बेटी को बोझ मानने जैसी घिनौनी सोच कैसे रखते हैं। नहीं! बेटियाँ बोझ नहीं हैं। वे परिवार का गर्व होती हैं! ऐसा कुछ भी नहीं है, जो बेटियाँ हासिल न कर सकें। बेटी जैसा प्यार कोई नहीं दे सकता। वह जरूरत पड़ने पर आपका सहारा बन जाती है, उस पर आप भरोसा कर सकते हैं और निर्भर हो सकते हैं। बेटियाँ वह सबकुछ कर सकती हैं, जो बेटे कर सकते हैं। तो यह भेदभाव क्योंᣛ? मुझे उम्मीद है कि अपने शो से हम लोगों को यह एहसास करायेंगे कि बेटी का होना गर्व की बात है। अपने विचार रखते हुए, वंदना वागले की भूमिका निभा रहीं पारिवा प्रणति ने कहा, “एक महिला होने के नाते मेरा दिल टूट जाता है, जब मैं देखती हूँ कि कुछ लोग बेटी का होना बुरा मानते हैं। यह देखकर ज्यादा दुख पहुंचता है कि कुछ
मांएं भी बेटी होने की खबर सुनकर असहज हो जाती हैं। हम बेटियाँ समाज की समझ से ज्यादा क्षमता रखती हैं। मुझे ऐसी महिला होने का सौभाग्य मिला है, जिसके माता-पिता ने न केवल उसे जन्म लेने दिया, बल्कि मैं आज जो हूँ, वह बनने में मेरी भरपूर मदद भी की। अजन्मी या नवजात बच्चियों को बोझ समझकर मार देना एक घृणित कृत्य है। महिलाएं न केवल अपने पैरों पर खड़ी होने में समर्थ हैं, बल्कि जरूरत पड़ने पर पूरे परिवार की देखभाल भी कर सकती हैं। अपनी बेटी को एक मौका दीजिये और देखिये कि वह दुनिया को जीत लेगी। हमारे शो के माध्यम से मैं लोगों को
बेटी का महत्व समझाने की कामना करती हूँ।” हमारे समाज के कुछ दुष्ट दानवों का शो के किरदार कैसे सामना करेंगे, जानने के लिये देखिये ‘वागले की दुनिया’
हर सोमवार से शुक्रवार, रात 9 बजे सिर्फ सोनी सब पर



