त्रिभाषा सूत्र को लागू करने का हरियाणा सरकार का सराहनीय प्रयास

संस्कृत भाषा भारत की सबसे प्राचीन भाषा है। यह न केवल भारत की ही महत्त्वपूर्ण भाषा है अपितु विश्व की प्राचीनतम व श्रेष्ठतम भाषा मानी जाती है। संस्कृत भाषा से ही दूसरी भाषाओं की उत्पति हुई हैं, इसलिए इसे सभी भाषाओं की जननी कहा जाता है।

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भाषाई विविधता को बढ़ावा देने के लिये राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 के मुताबिक, भारत के हर छात्र को कम से कम तीन भाषाएं सीखनी चाहिए, इनमें से दो मूल भारतीय भाषाएं होनी चाहिए, जिनमें से एक क्षेत्रीय भाषा होनी चाहिए। तीसरी भाषा अंग्रेज़ी होनी चाहिए। इस सूत्र को सरकारी और निजी दोनों स्कूलों में लागू किया जाना है। त्रिभाषा सूत्र में वैकल्पिक विषय के रूप में संस्कृत पर विशेष जोर दिया गया है। इसी ऐतिहासिक त्रिभाषा सूत्र को लागू करने वाला हरियाणा देश का पहला राज्य बन गया है।

इसके सम्बन्ध में हरियाणा स्कूल शिक्षा विभाग ने 20 फरवरी 2025 को एक आदेश पारित किया, जिसके तहत नवीन सत्र से प्रदेश के विद्यालयों में कक्षा नौवीं और दसवीं के छात्रों को अब सात विषय पढ़ने होंगे। नई शिक्षा नीति 2020 के अनुसार त्रिभाषा सूत्र के अन्तर्गत हिन्दी व अंग्रेजी भाषा के साथ छात्रों को अब तृतीय भाषा के रुप में पंजाबी, उर्दू व संस्कृत भाषा में से किसी एक भाषा को वैकल्पिक तौर पर चुनने का अवसर प्रात होगा।

त्रिभाषा सूत्र को लागू करवाने के लिये हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ, संस्कृत अकादमी एवं संस्कृतभारती हरियाणा के अथक प्रयासों के परिणामस्वरूप इसे क्रियान्वित करने में सफलता प्राप्त हुई है। इसके लिये संस्कृतभारती ने व्यापक हस्ताक्षर अभियान चलाया, संस्कृतभारती के प्रतिनिधि मंडल ने अन्य राज्यों की शिक्षा नीति का अध्ययन कर सरकार को रिपोर्ट सौंपी थी तथा शिक्षा विभाग के साथ संस्कृतभारती ने कई दौर की बैठकों का आयोजन भी किया था।

संस्कृत भाषा को जन भाषा बनाने के लिए सम्भाषण आन्दोलन का संचालन करने वाली संस्कृतभारती एक विश्व स्तरीय संगठन है। वर्ष 1981 से शुरू हुआ सम्भाषण आन्दोलन अब एक विराट रूप ले चुका है, भारत के सभी राज्यों सहित विश्व के 33 प्रमुख देशों में संस्कृतभारती कार्य कर रही है।

सम्भाषण शिबिर, प्रबोधन वर्ग, प्रशिक्षण वर्ग, साप्ताहिक मिलन, संस्कृत ग्राम, संवादशाला, बाल केन्द्र इत्यादि असंख्य गतिविधियों के माध्यम से संस्कृत भारती ने एक करोड़ से अधिक लोगों को संस्कृत सम्भाषण में कुशल बनाया है। संस्कृत भारती उत्तरक्षेत्र के संगठन मंत्री माननीय नरेंद्र कुमार व हरियाणा प्रान्त मंत्री श्री प्रमोद शास्त्री ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए हरियाणा सरकार व शिक्षा विभाग का धन्यवाद प्रकट किया।

त्रिभाषा सूत्र के लागू होने से हरियाणा के विद्यालयों में संस्कृत शिक्षकों के अधिक पद सृजित होंगे जिससे संस्कृत विषय में अधिक से अधिक रोजगार की संभावनाएं बढ़ेगी। त्रिभाषा सूत्र के ज़रिए, मातृभाषा आधारित बहुभाषावाद को बढ़ावा दिया जाता है। इसका मकसद, छात्रों को कई भाषाओं में कुशल बनाना है। इससे छात्रों के संज्ञानात्मक और तर्क कौशल का विकास होता है।

प्रत्येक भारतीय को भी संस्कृत भाषा का अध्ययन अवश्य करना चाहिए और यत्न करना चाहिए कि चाहिए और यत्न करना चाहिए कि निकट भविष्य में ही संस्कृत भाषा राष्ट्र भाषा बने तभी हम संसार में सच्ची विश्वशांति की स्थापना कर सकते हैं।

संस्कृत के बारे में कुछ रोचक तथ्य हैं, जिन्हें जान कर आपको भारतीय होने पर गर्व होगा।

  • संस्कृत को सभी भाषाओं की जननी माना जाता है।
  • संस्कृत उत्तराखंड की आधिकारिक भाषा है।
  • अरब लोगो की दखलंदाजी से पहले संस्कृत भारत की राष्ट्रीय भाषा थी।
  • नासा (NASA) के मुताबिक संस्कृत -धरती पर बोली जाने वाली सबसे स्पष्ट भाषा है।
  • संस्कृत में दुनिया की किसी भी भाषा से ज्यादा शब्द है। वर्तमान में संस्कृत के शब्दकोष में 102 अरब 78 करोड़ 50
    लाख शब्द है।
  • संस्कृत किसी भी विषय के लिए एक अद्भुत खजाना है। जैसे हाथी के लिए ही संस्कृत में 100 से ज्यादा शब्द है।
  • नासा (NASA) के पास संस्कृत में ताड़पत्रों पर लिखी 60,000 पांडुलिपियाँ है जिन पर नासा रिसर्च कर रहा है।
    फ़ोबर्स मैगज़ीन ने जुलाई, 1987 में संस्कृत को कम्प्यूटर सोफ्टवेयर के लिए सबसे बेहतर भाषा माना था।
  • किसी और भाषा के मुकाबले संस्कृत में सबसे कम शब्दो में वाक्य पूरा हो जाता है। संस्कृत दुनिया की अकेली ऐसी
    भाषा है जिसे बोलने में जीभ की सभी मांसपेशियो का इस्तेमाल होता है।
  • अमेरिकन हिन्दू युनिवर्सिटी के अनुसार संस्कृत में बात करने वाला मनुष्य बीपी, मधुमेह, कोलेस्ट्रॉल आदि रोग से मुक्त हो जाता है।
  • संस्कृत में बात करने से मानव शरीर का तंत्रिका तंत्र सदा सक्रिय रहता है जिससे कि व्यक्ति का शरीर सकारात्मक आवेश के साथ सक्रिय हो जाता है।
  • संस्कृत स्पीच थेरेपी में भी मददगार है। यह एकाग्रता को बढ़ाती है।
  • कर्नाटक के मुत्तुर गांव के लोग केवल संस्कृत में ही बात करते है।
  • सुधर्मा संस्कृत का पहला अखबार था, जो 1970 में शुरू हुआ था। आज भी इसका ऑनलाइन संस्करण उपलब्ध है।
  • जर्मनी की 14 यूनिवर्सिटीज़ में, संस्कृत पढ़ाई जाती है।

संस्कृत सीखने से दिमाग तेज हो जाता है और याद करने की शक्ति बढ़ जाती है। इसलिए लन्दन और आयरलैंड के कई विद्यालयों में संस्कृत जरूरी विषय है। -इस समय दुनिया के 17 से ज्यादा देशों की कम से कम एक यूनिवर्सिटी में तकनीकी शिक्षा के कोर्सेस में संस्कृत पढ़ाई जाती है।

अतः संस्कृत केवल स्वविकसित भाषा नहीं है बल्कि यह सभी भाषाओं की जननी है, संस्कृत देववाणी हैं। संस्कृत में विश्व का कल्याण है, शांति है, सहयोग है, और ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना है। अभी हाल ही में लोकसभा अध्यक्ष माननीय ओम बिरला जी ने लोकसभा की कार्यवाही के भाषाई रुपांतरण में छह भाषाएं जोडे जाने की घोषणा भी की है जिनमें संस्कृत भाषा को भी शामिल किया गया है।

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हरियाणा राज्य में छात्रों के हित के लिए संकल्पबद्ध भारतीय जनता पार्टी की सरकार माननीय मुख्यमंत्री श्री मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी जी के नेतृत्व में तथा शिक्षा मंत्री श्री महिपाल डांडा जी की अगुवाई में शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने नई शिक्षा नीति के त्रिभाषा सूत्र को धरातल पर लागू करने का एक सराहनीय प्रयास किया है। इसके परिणामस्वरूप छात्रों को अपनी संस्कृति एवं संभ्यता से जुड़ने का शुभ अवसर प्राप्त होगा जिससे रोजगार के साथ-साथ हमारे संस्कार एवं संस्कृति के गुणों का भी समावेश विद्यार्थियों में देखने को मिलेगा।

डॉ.पवन शर्मा

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