अन्नदाताओं की जीत हुई और अहंकारी सत्ता की हार : नरेंद्र भारद्वाज

ओपन सर्च ब्यूरो, गाजियाबाद। वरिष्ठ कांग्रेस नेता और गाजियाबाद महानगर कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष नरेंद्र भारद्वाज ने तीन काले कृषि कानूनों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा वापस लिए जाने के गत दिनों हुए ऐलान को अन्नदाताओं की जीत और अहंकारी सत्ता की हार करार दिया है। उन्होंने इस लंबे व अनवरत संघर्ष के लिए विभिन्न किसान संगठनों व उन्हें समर्थन देने वालों को बधाई दी है।
उन्होंने कहा कि गत वर्ष शुरू हुए सरकार विरोधी किसान आंदोलन को जब कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी बाड्रा ने अपना नैतिक समर्थन दिया, उसी समय यह तय हो गया कि किसानों की जीत होगी। क्योंकि दिग्गज कांग्रेस नेताओं द्वारा किसानों के साथ खड़े होने के बाद पूरे देश में कांग्रेसियों के बीच एक सकारात्मक संदेश गया, जिसके बाद उन्होंने जगह जगह पर आंदोलनकारियों का साथ देना शुरू किया। इसके बाद तो सारा विपक्ष किसानों के साथ हो गया। यूपी बॉर्डर, सिंधु बॉर्डर आदि पर पहुंचकर जिस तरह से विभिन्न नेताओं ने अपना नैतिक समर्थन और सहयोग दिया, उससे किसानों के आंदोलन को मज़बूती मिली।
कांग्रेस के पूर्व महानगर अध्यक्ष नरेंद्र भारद्वाज ने कहा कि देश का सालों भर पेट भरने वाले किसानों ने जाड़ा, गर्मी और बारिश की परवाह किये बगैर जिस तरह की एकजुटता और धैर्य का परिचय दिया है, वह अतुलनीय है। उन्होंने कहा कि इस आंदोलन के क्रम में लगभग 6-7 सौ किसान शहीद हो गए। बहुतेरे घायल हुए, जेल गए, पर हिम्मत नहीं हारी। अंततः केंद्र सरकार को मानना पड़ा कि वो किसानों को कृषि कानूनों के लाभों को समझाने में असफल रही, क्योंकि उसमें किसानों का हित ही निहित नहीं था। अंततः सरकार को तीनों काले कृषि कानूनों को वापस लेना पड़ा, जो किसानों की बड़ी जीत है। वहीं, कांग्रेस की प्रदेश प्रवक्ता डॉली शर्मा ने भी किसानों की जीत को ऐतिहासिक करार दिया और कहा कि यह तो सिर्फ झांकी है। जब तक सरकार किसानों के पक्ष में जनहितैषी कदम नहीं उठाती, उनका वाजिब हक उन्हें देने की तैयारी नहीं करती, तबतक हमलोग उसे चैन से नहीं रहने देंगे। इस जनविरोधी सरकार को पहले यूपी की सत्ता से बेदखल करेंगे, उसके बाद केंद्रीय सत्ता से। उन्होंने नारा दिया- कांग्रेस लाओ, देश बचाओ।



