Editorial : जगदीश धनखड़ का इस्तीफे के कारण

Editorial: Reasons for Jagdish Dhankhar's resignation

Editorial : भारत में राष्ट्रपति के बाद दूसरा सर्वोच्च पद है उपराष्ट्रपति का। यह पद हमारे पंतप्रधान से बड़ा होता है। कई बार लोगोने देखा है और मिडिया में तस्वीरें भी प्रकाशित हुई जिस में देखा जा सकता है कि यह साहब मोदी के अभिवादन के लिए 90 डिग्री तक झुक जाते थे। अपनी न सही अपने पद की गरिमा को तो रखते।

वैसे तो इस्तीफे का कारण धनखड़ ने अपने स्वास्थ्य का बताया है। लेकिन सभी जानते हैं कि यह तो दिखावे का कारण है। असल बात तो कुछ और ही है। और वह असल बात क्या है उस को ले कर लोगों और मिडिया में कई अटकलें चल रही हैं। खैर, एक बात है।

धनखड़ ने बंगाल के गवर्नर और बाद में उपराष्ट्रपति के पदों को ऐसा शरमाया कि कोई भी स्वाभिमानी उन पदों पर बिराजमान नहीं होना चाहेगा। धनखड़ गवर्नर और उपराष्ट्रपति कम और भाजपा के कार्यकर्ता अधिक नजर आते थे। इन्होने इन दोनों पदों की गरिमा को तार, तार किया।

करीब एक सौ विपक्ष के सांसदों को एक साथ बर्खास्त कर देना, सुप्रीम कोर्ट को नसीहत देना कि वह राष्ट्रपति एवं उपराष्ट्रपतिको यह नहीं कह सकती कि उन्हें क्या करना चाहिए और क्या नहीं। अगर उन का स्वास्थ्य वाकई ख़राब है तो मोदी सरकार को चाहिए कि उन का इलाज विदेश में सरकारी खर्च से कराए।

यहाँ एक बात याद आती है। स्वर्गस्थ राजीव गाँधी जब पंतप्रधान थे और अटल बिहारी वाजपेयी विपक्ष के नेता थे तब वाजपेयी जी का इलाज कराने राजीव जी ने उन्हें सरकारी खर्च पर विदेश भेजा था। लेकिन एक बात याद रखना जरूरी है। मोदी राजीव नहीं है।

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धनखड़ ने स्वयं इस्तीफा दिया या उन से लिया गया यह तो समय आने पर शायद पता चलेगा। एक बात लोगो ने और मीडीयाने नोट की थी। इधर कुछ दिनों से उन का रवैया कुछ बदला हुआ नजर आने लगा था। वे पेशे से सुप्रीम कोर्ट के वकील है। स्वयं को किसान कहते हैं। किसान नेता देवीलाल के साथ पॉलिटिक्स में आए, पहले कांग्रेस और बाद में भाजप के हो गए।

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