Editorial : मानवाधिकार कानून का उल्लंघन
Editorial: Violation of human rights law

Editorial : गाजा में खाद्य पदार्थों और ईंधन आदि रसद पर भी इजरायल की नाकेबंदी है। इजरायल गाजा पर कब्जा करना चाहता है, लेकिन आवरण आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई का है। गाजा ने अब तक 57 बच्चे कुपोषण के कारण जिंदगी गंवा चुके हैं। संयुक्त राष्ट्र के एक उच्च अधिकारी का आकलन है कि यदि मानवीय सहायता यथाशीघ्र नहीं पहुंची, तो करीब 14000 नवजात शिशु कभी भी दम तोड़ सकते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि उसके पास करीब 500 बच्चों के इलाज के लायक ही सामग्री बची है।
इजरायल के पूर्व जनरल एवं विपक्षी नेता यायर गोलान प्रधानमंत्री नेतन्याहू की ऐसी युद्ध-नीति के घोर आलोचक हैं। उनका मानना है कि कोई भी सभ्य देश बच्चों की हत्या का शौक नहीं पालता। लोगों को विस्थापित करने के लक्ष्य नहीं बनाता। यह आतंकवाद के नहीं, मानवता के खिलाफ युद्ध है।
बहरहाल गाजा पट्टी में इजरायल की नाकेबंदी के कारण आटा 5000 फीसदी और तेल 1200 फीसदी तक महंगे बिक रहे हैं। खीरे की कीमत 7 गुना बढ़ गई है। बेबी फूड 4 गुना से अधिक महंगा हो चुका है और मटर अब करीब 1000 फीसदी महंगा हो गया है। रसोई गैस के दाम 2400 फीसदी बढ़ जाने से खाना बनाना असंभव-सा हो गया है।
यह विश्व का कौनसा भूखंड है, जहां कोई कायदा-कानून नहीं है। कोई वैश्विक नियंत्रण नहीं है। इन हालात के बावजूद गाजा में अमरीका भी विकास-योजना के बयान देता रहा है। वह गाजा का पुनर्निर्माण करवाना चाहता है। अमरीकी राष्ट्रपति Trump न तो गाजा में, अपने मित्र, इजरायल को महाविनाश से रोक पाए हैं और न ही रूस-यूक्रेन के बीच शांति-समझौता कराने में सफल रहे हैं।
Editorial : प्रकृति के साथ सामंजस्य और विकास
गाजा में इजरायल हमास का आतंकवाद मिट्टी में मिला देना चाहता है, लेकिन हमास आज भी जिंदा है। हालांकि 7 अक्तूबर, 2023 को इजरायल पर हमास के आतंकी हमले के बाद से अघोषित युद्ध जारी है, लेकिन गाजा पट्टी अब लगभग खंडहर हो चुका है। हमास का अस्तित्व अब भी है, क्योंकि कुछ हमले उसकी ओर से भी किए जाते रहे हैं। अल्प युद्धविराम के बाद इजरायल ताबड़तोड़ हवाई हमले कर रहा है, नतीजतन मानवता लगातार लाश बनती जा रही है।



