Ekadashi Pooja : 16 फरवरी को फाल्गुन मास की विजया एकादशी, जानिए पूजा विधि-मुहर्त

Ekadashi Pooja : एकादशी का हिन्दू धर्म में बहुत महत्व होता है। हर माह में दो बार एकादशी आती है। फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी विजया एकादशी का व्रत 16 फरवरी गुरुवार को रखा जाएगा। इस दिन भगवान विष्णु की विधि विधान से पूजा की जाती है और उन्हें प्रसन्न किया जाता है।
सबसे पहले श्रीराम ने किया था व्रत
पद्म पुराण और स्कंद पुराण के अनुसार स्वयं भगवान राम ने लंका पर विजय प्राप्त करने के लिए इसी एकादशी का व्रत के अनुसार ये व्रत सबसे पहले श्रीराम ने किया था। इसके बाद से हर युग में होने लगा। मान्यता है कि विजया एकादशी का व्रत रखने और विधि-विधान से पूजा करने से विपरीत परिस्थितियां व्यक्ति के लिए अनुकूल होने लगती हैं और शत्रुओं पर विजय प्राप्ति होती है।
Vijaya Ekadashi 2023
विजया एकादशी व्रत के बारे में शास्त्रों में लिखा है कि यह व्रत करने से स्वर्णणदान,भूमि दान,अन्न दान और गौ दान से अधिक पुण्य फलों की प्राप्ति होती है और अंततः प्राणी को मोक्ष की प्राप्ति होती है।यह भी मान्यता है कि इस महानपुण्यदायक व्रत को करने से व्रती को वाजपेय यज्ञ का फल मिलता है एवं सभी मनोरथ सिद्ध होते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार यदि आपका कोई शत्रु आपको परेशान करता है तो उसे परास्त करने के लिए ये व्रत करना अच्छा रहता है।
मुहर्त
एकादशी तिथि प्रारम्भ – फरवरी 16 ,2023 को 05:32 बजे सुबह
एकादशी तिथि समाप्त – फरवरी 17 ,2023 को 02:49 सुबह
पंचांग के अनुसार, फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 16 फरवरी दिन गुरुवार को सुबह 05 बजकर 32 मिनट पर शुरू हो रही है और 17 फरवरी को तड़के 02 बजकर 49 मिनट पर समाप्त हो रही है। उदयातिथि के आधार पर विजया एकादशी का व्रत 16 फरवरी को रखा जाएगा।
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एकादशी पूजा की विधि
एकादशी के दिन सूर्योदय से पहले उठकर घर की सफाई और स्नान आदि कर ले।इसके बाद व्रत का संकप्ल ले। भगवान विष्णु की मूर्ति की स्थापना करे। धुप,दिप,चंदन,फूल व तुलसी से श्री हरी की पूजा करे और भोग लगाए ,जिसमे तुलसी जरूर रखे।यह एकादशी का व्रत निर्जला रहकर,फलहार करके या फिर एक समय सात्विक भोजन करके भी रखा जा सकता है विजया एकादशी पर शख में दूध और गंगाजल भरकर श्रीकष्ण का अभिषेक करे।इसके बाद तुलसी परत चढ़ाए। ऐसा करने से एकादशी का पूरा फल मिलता है।
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