मनीष सिसोदिया ने की निगम स्कूलों में मिशन बुनियाद के क्रियान्वयन को लेकर की चर्चा

बैठक में श्री सिसोदिया ने कहा कि कोरोना महामारी के दौरान पिछले 2 सालों में बच्चों की लर्निंग में बड़ा गैप आया है| नए सत्र में स्कूलों के पूरी तरह से खुलने के बाद अब ये बेहद जरुरी हो गया है जरुरी कदम उठाते हुए इस लर्निंग गैप को खत्म करने का काम किया जाए| उन्होंने कहा कि बच्चों की पढ़ाई में आए इस गैप को खत्म करने के लिए शिक्षा निदेशालय और नगर निगम के स्कूलों को साथ मिलकर काम करना होगा| उन्होंने निगमायुक्तों से चर्चा करते हुए कहा कि मिशन बुनियाद का बेहतर क्रियान्वयन हो सके इसलिए सभी निगमायुक्त ये सुनिश्चित करें की वे एमसीडी के स्कूलों के प्रिंसिपलों से बात कर मिशन बुनियाद की प्रगति की जाँच करें|
उल्लेखनीय है कि एससीईआरटी ने मिशन बुनियाद के तहत स्टूडेंट लीर्निग मटेरियल व टीचर मैन्युअल भी तैयार किया है| इसमें 25 वर्कशीट की गणित की वर्कबुक, बच्चों पढ़ने-सुनने-बोलने व राइटिंग स्किल को बेहतर बनाने के लिए 26 कहानियों की एक किताब शामिल है|
*मिशन बुनियाद का उद्देश्य*
– कक्षा 3 से 5वीं तक का हर बच्चे पढ़ने-लिखने के साथ बेसिक गणित के सवाल हल कर सके
-बच्चों पर सिलेबस का भार डालने के बजाय उनके बुनियाद को मजबूत करना
– बच्चों की लर्निंग लेवल के अनुसार टीचिंग व सपोर्ट
-बच्चों की प्रगति जांचने के लिए पीरियोडिक असेसमेंट
*क्या होगा मिशन बुनियाद का एक्शन प्लान*
– सभी एमसीडी आयुक्त अपने स्कूलों के प्रिंसिपल के साथ मीटिंग कर मिशन बुनियाद के क्रियान्वयन पर चर्चा करेंगे व व्यक्तिगत तौर पर उसके प्रगति की जाँच करेंगे|
– सिलेबस से अलग हटकर अगले तीन महीनों तक बच्चों के पढ़ने-लिखने व बुनियादी गणित की क्षमताओं को बेहतर बनाने का काम किया जाएगा|
– ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान स्कूलों में होगा समर कैंप का आयोजन, कैंप में प्रतिदिन कम से कम 1-1 घंटे होगी बेसिक लिटरेसी व न्यूमरेसी की क्लास
– नगर निगम के स्कूलों में भी किया जाएगा मेगा पीटीएम का आयोजन पेरेंट्स को बच्चों को नियमित रूप से स्कूल भेजने के लिए किया जाएगा प्रेरित
– शिक्षा निदेशालय ,नगर निगम के स्कूलों को देगी कॉमन पोर्टल एक्सेस ताकि मिशन बुनियाद के बेहतर क्रियान्वयन व बच्चों की प्रगति जांचने के लिए हर सप्ताह स्कूल कर सके डेटा अपलोड
साथ ही हर साल एमसीडी फीडर स्कूलों से डीओई के स्कूलों में होने वाले प्लांड एडमिशन को लेकर उपमुख्यमंत्री ने कहा कि कई मौकों पर देखा गया है कि स्टूडेंट्स अन्य स्कूलों में एडमिशन ले लेते है या दिल्ली छोड़ कर अपने मूल स्थानों पर चले जाते है उसके बावजूद भी उनका नाम एमसीडी फीडर स्कूलों के डेटाबेस में मौजूद होता है और एडमिशन के दौरान कई फीडर स्कूलों द्वारा उनका स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट भी जारी कर दिया जाता है| इसके कारण प्लांड एडमिशन के तहत टोटल नंबर ऑफ़ एनरोलमेंट व एक्चुअल नंबर ऑफ़ एडमिशन में अंतर देखने को मिलता है| उन्होंने कहा कि समय रहते एमसीडी फीडर स्कूलों द्वारा इस त्रुटी को दूर कर लेना चाहिए ताकि संसाधनों का सही इस्तेमाल हो सके|



