Editorial : नीट विवाद और संसद का गतिरोध

Editorial: The NEET Controversy and the Parliamentary Deadlock
Editorial: The NEET Controversy and the Parliamentary Deadlock

Editorial : लोकतंत्र में संसद जनभावनाओं को अभिव्यक्त करने और सरकार से जवाबदेही सुनिश्चित करने का सर्वोच्च मंच है। किंतु जब संसद लगातार तीसरे दिन भी ठप हो जाए, तो यह केवल राजनीतिक टकराव नहीं बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया के प्रभावित होने का संकेत भी है। नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर विपक्ष द्वारा केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग और सरकार के अड़ियल रुख के कारण संसद की कार्यवाही बार-बार स्थगित हो रही है।

नीट परीक्षा देश के लाखों विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़ी सबसे महत्वपूर्ण परीक्षाओं में से एक है। परीक्षा में कथित पेपर लीक, अनियमितताओं और पारदर्शिता पर उठे सवालों ने अभ्यर्थियों और उनके अभिभावकों में गहरी चिंता पैदा की है। ऐसे संवेदनशील मुद्दे पर स्वाभाविक रूप से विपक्ष सरकार से जवाब मांग रहा है। विपक्ष का कहना है कि जब तक शिक्षा मंत्री नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए इस्तीफा नहीं देते, तब तक निष्पक्ष जांच और जवाबदेही सुनिश्चित नहीं हो सकती।

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दूसरी ओर, सरकार का तर्क है कि मामले की जांच संबंधित एजेंसियां कर रही हैं और केवल आरोपों के आधार पर किसी मंत्री का इस्तीफा मांगना उचित नहीं है। सरकार का यह भी कहना है कि संसद में चर्चा के लिए वह तैयार है, लेकिन विपक्ष का उद्देश्य बहस नहीं बल्कि सदन की कार्यवाही बाधित करना है। इस राजनीतिक खींचतान का सबसे बड़ा नुकसान संसद की कार्यक्षमता और जनता के हितों को हो रहा है।

संसद का समय अत्यंत मूल्यवान होता है। हर दिन की कार्यवाही पर करोड़ों रुपये का सार्वजनिक धन खर्च होता है। जब सदन नहीं चलता, तब महत्वपूर्ण विधेयक, नीतिगत चर्चाएं और जनहित के अनेक विषय पीछे छूट जाते हैं। लोकतंत्र में विरोध आवश्यक है, लेकिन उसका उद्देश्य समाधान निकालना होना चाहिए, न कि केवल गतिरोध उत्पन्न करना।

नीट विवाद ने देश की परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्न खड़े किए हैं। सरकार को चाहिए कि जांच प्रक्रिया को पूरी पारदर्शिता के साथ आगे बढ़ाए, दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करे और परीक्षा व्यवस्था में ऐसे सुधार करे जिससे भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

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वहीं विपक्ष को भी अपनी भूमिका इस प्रकार निभानी चाहिए कि संसद की गरिमा बनी रहे और जनता के मुद्दों पर सार्थक चर्चा हो सके। लोकतंत्र की मजबूती टकराव से नहीं, बल्कि संवाद, जवाबदेही और पारदर्शिता से होती है। नीट विवाद का समाधान भी राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से नहीं, बल्कि निष्पक्ष जांच, जवाबदेह शासन और संसद में सार्थक विमर्श से ही संभव है। यही विद्यार्थियों के हित, लोकतंत्र की प्रतिष्ठा और देश के भविष्य के लिए सबसे उचित मार्ग होगा।

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