Editorial: डॉ. मनमोहन सिंह पर राजनीति
Editorial: Politics on Dr. Manmohan Singh

Editorial: प्रधानमंत्री डॉ. मन मोहन सिंह की जीवन यात्रा के पूर्ण होने के बाद उनके उनके अंतिम संस्कार स्थल को लेकर देश में राजनीति हो रही है। डॉ. मन मोहन सिंह की पार्थिव देह का अंतिम संस्कार निगम बोध घाट पर किया गया। डॉ. मनमोहन सिंह का अंतिम संस्कार ऐसे स्थल पर करने के लिए सरकार से आग्रह किया गया था, जहां उनका स्मारक बनाया जा सके। लेकिन सरकार ने आग्रह नहीं मानी और दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री का अंतिम संस्कार एक सामान्य नागरिक की तरह निगम बोध श्मशान में कराया गया। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी का अंतिम संस्कार 17 अगस्त 2018 को विजयघाट पर किया गया था, लेकिन तब अटल जी की पार्टी की सरकार थी और कल जब डॉ. मन मोहन सिंह का अंतिम संस्कार किया गया तब उनकी पार्टी की सरकार नहीं थी अन्यथा वे भी किसी विजय घाट पर ही अग्नि की समर्पित किये जाते। पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के अंतिम संस्कार के लिए स्थल और उनके नाम पर स्मारक को लेकर सियासी घमासान मचा हुआ है। दुनिया भर में आज तक सभी पूर्व राष्ट्र प्रमुखों की गरिमा का आदर करते हुए उनके अंतिम संस्कार अधिकृत समाधि स्थलों में किए जाते हैं ताकि हर व्यक्ति बिना किसी असुविधा के अंतिम दर्शन कर श्रद्धांजलि दे पाए। राष्टï्रीय स्मारक स्थल के लिए यूपीए सरकार के जमाने में 2013 में अलग से जिस जगह का आवंटन किया गया था वहीं पर 2018 में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का अंतिम संस्कार किया गया था, लेकिन डॉ. मन मोहन सिंह का अंतिम संस्कार निगम बोध घाट पर कराया गया। सवाल यह खड़ा हो गया है कि क्या भविष्य में देश के पूर्व प्रधानमंत्रियों और राष्ट्रपतियों के अंतिम संस्कार के समय इसी तरह के विवाद खड़े होंगे या इस मुद्दे पर कोई स्पष्ट प्रोटोकॉल तय किया जाएगा?



