Editorial : ‘काला सोमवार’
Editorial : 'Black Monday'

Editorial : सात अप्रैल का सोमवार ‘काला सोमवार’ के नाम से इतिहास में दर्ज हो गया। केवल पांच मिनटों में शेर मार्किट में निवेशकों के 19 लाख करोड़ रूपए स्वाहा हो गए। हालांकि इस में कुछ सुधार हुआ लेकिन फिर भी दिन के अंत में 16 लाख करोड़ का नुकसान तो हुआ ही।
याद रहे कि इन निवेशकों में मध्यम वर्ग के लोग अधिक हैं। इसके आलावा जीवन बिमा निगम जैसी संस्थाओं के भी पैसे निवेश होते हैं, इस का मतलब ऐसी संस्थाओं को भी बहुत बड़ा नुकसान उठाना पड़ा। भारत में एक प्रकार से हाहाकार मच गया।
लोगों का कहना है कि ऐसा होने का कारण है अमरीकी प्रेसिडेंट, जो हमारे प्रधानमंत्री के दोस्त है, उन के द्वारा भारत पर लगाए गए 26 प्रतिशत टेरिफ है। ट्रम्प ने पिछले कुछ दिनों से विश्वभर के कई देशों के साथ आर्थिक युद्ध छेड़ रखा है। लेकिन जहाँ पर मेक्सिको, चीन, केनेडा जैसे कई देस हैं जो ट्रम्प को उन की ही भाषा में जवाब दे रहे हैं।
अमरीका से उन के देस में आयत होने वाली वस्तुओं पर यह देस जवाबी टेरिफ लगा रहे हैं। सरकार को पता था कि ट्रम्प 26 प्रतिशत टेरिफ लगाने वाले हैं। और इस लिए इस मुद्देको ही गायब कर के वक्फ बिल को लाया गया ता कि देसभर में केवल इसी की चर्चा हो। वक्फ बिल को तो कई लोगोंने और पार्टियों ने सर्वोच्च न्यायलय में चुनौती दी है।
यह कानून मूलभूत अधिकारों का हनन करता है। खैर, अब देखना यह है कि सर्वोच्च न्यायलय में जब सुनवाई होगी तो सरकार क्या जवाब पेश करेगी और सर्वोच्च न्यायलय क्या फैसला देगा। लेकिन सवाल यह है कि भारत में आर्थिक क्षेत्र में भूचाल आ गया और हमारी सरकार खामोश है!
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लोगों का कहना है आने वाले दिन तो इस से भी अधिक ख़राब आने वाले है। ट्रम्प किस समय और कौन से टेरिफ लगाएंगे कोई कह नहीं सकता। शेयर बाजार में निवेश सदैव खतरे से भरा रहता है। कब किस समय क्या हो जाए कोई कह नहीं सकता। इस के बावजूद लाखों लोग शेयरो में निवेश करते हैं। लेकिन अब लोगों के शेर बाजार की विश्वश्नीयता पर ठेस पहुंची है।



