राकेश शर्मा : सेवा, संवेदना और सम्मान की राष्ट्रीय गाथा

Rakesh Sharma: National saga of service, compassion and respect

नई दिल्ली रेलवे स्टेशन—जहाँ प्रतिदिन लाखों यात्रियों की चहल-पहल, उम्मीदें और गंतव्य एक-दूसरे से जुड़ते हैं—वहीं एक ऐसा व्यक्तित्व है, जिसने प्रशासनिक दायित्वों को मानवीय संवेदना, ईमानदारी और करुणा से जोड़कर जनसेवा की एक अनुकरणीय परंपरा स्थापित की है।

यह नाम है श्री राकेश शर्मा, स्टेशन प्रबंधक, नई दिल्ली रेलवे स्टेशन—जो आज भारतीय रेल में सेवा, विश्वास और मानवता के सशक्त प्रतीक के रूप में प्रतिष्ठित हो चुके हैं।

तीन दशकों से अधिक के अपने सेवाकाल में श्री शर्मा ने यह सिद्ध कर दिखाया है कि जब प्रशासन संवेदनशील हाथों में हो, तो रेलवे स्टेशन केवल एक परिवहन केंद्र नहीं, बल्कि सुरक्षा, भरोसे और मानवीय मूल्यों का सशक्त आश्रय बन जाता है।

‘नृत्य समर्पण’ महोत्सव में अतिथि सम्मान

02 जनवरी 2025 को सुरम्या – एन इंस्टिट्यूशन ऑफ परफॉर्मिंग आर्ट्स द्वारा आयोजित प्रतिष्ठित ‘नृत्य समर्पण’—एकल शास्त्रीय नृत्य प्रस्तुतियों के भव्य सांस्कृतिक महोत्सव—में श्री राकेश शर्मा को गेस्ट ऑफ ऑनर के रूप में आमंत्रित किया गया। उनकी गरिमामयी उपस्थिति ने इस सांस्कृतिक आयोजन को विशेष ऊँचाई प्रदान की।

इस अवसर पर पद्मश्री से सम्मानित, प्रख्यात कथक गुरु श्रीमती शोवना नारायण द्वारा श्री शर्मा को उनके असाधारण जनसेवा कार्यों और विशिष्ट प्रशासनिक योगदान के लिए सम्मान-स्मृति चिन्ह प्रदान किया गया। यह सम्मान इस बात का प्रतीक बना कि सच्ची सेवा कला, संस्कृति और प्रशासन—हर क्षेत्र में समान रूप से आदर प्राप्त करती है।

राष्ट्रीय विशेष श्रेणी उपलब्धि सम्मान – 2025

शनिवार, 27 दिसंबर 2025 को स्पीकर हॉल, कॉन्स्टीट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया, नई दिल्ली में आयोजित 12वाँ राष्ट्रीय गौरव सम्मान–2025 समारोह में श्री राकेश शर्मा को प्रशासनिक सेवा क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान हेतु “राष्ट्रीय विशेष श्रेणी उपलब्धि सम्मान–2025” से अलंकृत किया गया।
यह गरिमामयी सम्मान
डॉ. अभिषेक वर्मा (मुख्य राष्ट्रीय समन्वयक—एनडीए गठबंधन एवं चुनाव, शिवसेना),
लेफ्टिनेंट जनरल मनोज कुमार मागो (एवीएसएम, वाईएसएम, एसएम—द्वितीय),
‘आज का प्रहरी’ के प्रधान संपादक श्री संतोष दूबे
एवं डॉ. आलोक कुमार मिश्र (जॉइंट सेक्रेटरी, ई एंड एम)
के कर-कमलों से प्रदान किया गया।

मार्तंड सम्मान : सेवा के तीन दशकों का गौरव

12 दिसंबर को परम पूज्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज द्वारा श्री राकेश शर्मा को “मार्तंड सम्मान” से विभूषित किया गया। यह सम्मान उन्हें रेलवे सेवा में अपने तीन दशकों के समर्पित, निःस्वार्थ और अनुकरणीय कार्यकाल के लिए प्रदान किया गया।

यह सम्मान कुरुक्षेत्र गुरुकुल फाउंडेशन द्वारा आयोजित समारोह में दिया गया, जिसका नेतृत्व संस्था के संस्थापक अध्यक्ष श्री संदीप देव ने किया। विशेष रूप से उन्हें ट्रेनों एवं प्लेटफार्मों पर यात्रियों की खोई हुई वस्तुओं को खोजकर सुरक्षित रूप से लौटाने में निरंतर सहयोग और मानवीय संवेदनशीलता के लिए सराहा गया।

सेवा की वह मिसाल, जो दिलों को छू जाए

अपने अब तक के सेवाकाल में श्री राकेश शर्मा ने 1,920 से अधिक यात्रियों के खोए हुए मोबाइल फोन, लैपटॉप, टैबलेट, आभूषण, नकद राशि एवं अन्य कीमती वस्तुएँ उनके वास्तविक स्वामियों को सुरक्षित रूप से लौटाकर मानवता की अद्वितीय मिसाल प्रस्तुत की है।

देशी यात्रियों से लेकर विदेशी नागरिकों तक—हर व्यक्ति के प्रति उनकी त्वरित कार्यशैली, विनम्र व्यवहार और संवेदनशील दृष्टिकोण ने भारतीय रेल के प्रति जनविश्वास को और अधिक मजबूत किया है।

सम्मान, जो सेवा का उत्सव बन गए

श्री राकेश शर्मा को इससे पूर्व भी उनकी प्रेरणादायी सेवाओं के लिए अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाज़ा जा चुका है, जिनमें प्रमुख हैं-

अति विशिष्ट रेल सेवा पुरस्कार
समाज रत्न सम्मान
प्रेरणादीप सम्मान
रेलवे पैसेंजर फैसिलिटेटर इन ट्रेन ऑपरेशन सम्मान
इसके अतिरिक्त उन्हें
माननीय रेल राज्य मंत्री,
रेलवे बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारी,
उत्तरी रेलवे के महाप्रबंधक,
दिल्ली मंडल के मंडल रेल प्रबंधक
एवं अनेक सामाजिक संस्थाओं द्वारा भी सम्मानित किया गया है।

मानवता के दीपस्तंभ

श्री राकेश शर्मा की सादगीपूर्ण कार्यशैली और निस्वार्थ सेवा भावना यह प्रमाणित करती है कि जब ईमानदारी सेवा से जुड़ती है, तो वह समाज के लिए प्रकाशस्तंभ बन जाती है। उनका जीवन और कर्म भारतीय रेल के उस मूल मंत्र को साकार करता है-“यात्रियों की सुरक्षा, संतुष्टि और विश्वास—यही हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।”

यह सम्मान केवल एक व्यक्ति की उपलब्धि नहीं, बल्कि भारतीय रेल की उस जीवंत आत्मा का उत्सव है, जो सेवा, संवेदनशीलता और सच्ची मानवता से ओतप्रोत है। निस्संदेह, श्री राकेश शर्मा की यह यात्रा प्रशासनिक सेवा, सामाजिक उत्तरदायित्व और मानवीय मूल्यों के समन्वय की एक प्रेरक राष्ट्रीय कथा है-जो आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव पथप्रदर्शक बनी रहेगी।

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