चुनाव आयोग का अपना नया नियम
Election Commission's own new rule

चुनाव सुधार कार्यक्रम के तहत समय-समय पर नए-नए नियम चुनाव आयोग द्वारा सभी राजनीतिक दलों की सहमति से तैयार किए गए हैं। 24 मई से सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यों की खंडपीठ चुनाव आयोग से संबंधित याचिकाओं की सुनवाई करने जा रही है। चुनाव आयोग ने मतदान से संबंधित जानकारी केवल प्रतिशत के आधार पर, प्रथम चरण के मतदान की जानकारी 11 दिन बाद और द्वितीय चरण के मतदान की जानकारी चार दिन बाद चुनाव आयोग के पोर्टल पर अपलोड की थी। चुनाव आयोग ने अपना नया नियम बना लिया है। पारदर्शिता के नाम पर गोपनीयता का जो खेल सरकार खेल रही थी। उसे सुप्रीम कोर्ट ने उजागर कर दिया। इसी तरह से वर्तमान चुनाव आयोग की कलई को पूर्व चुनाव आयुक्त कुरैशी ने उजागर कर दिया है। मतगणना के समय सभी उम्मीदवारों के पास यह जानकारी उपलब्ध होती है। मतगणना के समय वह ईवीएम मशीनों के नंबर को चेक कर सकते हैं। चुनाव अधिसूचना जारी होने के बाद से चुनाव आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन की शिकायतों का निपटारा चुनाव आयोग द्वारा तय समय सीमा पर नहीं किया गया है। चुनाव आयोग ने कहा है, डाक मत पत्र की जानकारी फार्म 17 सी में नहीं होती है ऐसी स्थिति में यह जानकारी सार्वजनिक नहीं की जा सकती है। फार्म 17 सी में पीठासीन अधिकारी को ईवीएम और वीवीपेट मशीनों के नंबर लिखने होते हैं। मतदान केंद्र में कितने वोटर पंजीकृत हैं। सूचना अधिकार कानून के तहत भी जानकारी नहीं दी जा रही है। जिसके कारण चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर प्रश्न चिन्ह लग चुका है। चुनाव आयोग को कोलकाता हाईकोर्ट की कड़ी फटकार चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन वाले मामले में लग चुकी है। उसके बाद भी चुनाव आयोग के रवैया में कोई परिवर्तन देखने को नहीं मिल रहा है।



