Editorial : दिल्ली की धड़कन चांदनी चौक
Editorial: Chandni Chowk, the heart of Delhi

Editorial : दिल्ली सरकार द्वारा ऐतिहासिक चांदनी चौक बाज़ार को स्थायी रूप से बंद करने की घोषणा ने पूरे शहर को चौंका दिया है। यह फैसला चाहे सुरक्षा कारणों से लिया गया हो, या शहरी पुनर्विकास की योजना का हिस्सा हो इसका असर दिल्ली की सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और आर्थिक पहचान पर गहरा पड़ेगा।
चांदनी चौक केवल एक बाज़ार नहीं है। यह दिल्ली का दिल है एक ऐसा स्थान जहां मुगलकालीन विरासत, विविध भारतीय संस्कृति और जनजीवन एक साथ सांस लेते थे। शाहजहाँ द्वारा 17वीं शताब्दी में बसाया गया यह क्षेत्र, उनकी बेटी जहाँआरा द्वारा डिज़ाइन किया गया था। इस बाज़ार को बंद करना मानो इतिहास के ज़िंदा पन्ने को फाड़ देने जैसा है।
सरकार का यह फैसला हज़ारों व्यापारियों, कारीगरों और श्रमिकों की रोज़ी-रोटी पर सीधा प्रहार है। कई परिवार पीढ़ियों से यहां व्यापार कर रहे हैं। इतने बड़े स्तर पर रोज़गार का नुकसान सिर्फ एक बाज़ार की बात नहीं है यह एक पूरे ताने-बाने के टूटने जैसा है।
इसके साथ ही, दिल्ली और भारत एक अनोखे सांस्कृतिक अनुभव से वंचित हो जाएंगे देसी घी में तली जा रही जलेबी की खुशबू, दुकानदारों की आवाज़ें, भीड़-भाड़ में भी एक लय, एक व्यवस्था ये सब अब इतिहास बन जाएंगे। दिल्ली सरकार को इस फैसले के पीछे की पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करनी चाहिए। सिर्फ इमारतें बनाना विकास नहीं है इतिहास और पहचान को बचाए रखना भी उतना ही ज़रूरी है।



