Editorial : राष्ट्रनिर्माण के पथप्रदर्शक मोहन भागवत
Editorial: Mohan Bhagwat, the pioneer of nation building

Editorial : 11 सितंबर को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी का जन्मदिवस है। यह दिन केवल एक व्यक्ति के जन्म का उत्सव नहीं है, बल्कि उस विचारधारा और नेतृत्व का सम्मान है जिसने भारत के सामाजिक-सांस्कृतिक जीवन को एक नई दिशा दी है।
मोहन भागवत जी का जीवन एक साधना है राष्ट्र के लिए, समाज के लिए और एक संगठित भारत के लिए। उन्होंने विज्ञान में स्नातक की शिक्षा प्राप्त की, पशुचिकित्सा विज्ञान में डिग्री ली, लेकिन उनका मन राष्ट्रसेवा की ओर खिंचता चला गया। उन्होंने संघ के प्रचारक के रूप में जीवन अर्पित कर दिया और निरंतर तप, त्याग और अनुशासन के साथ संघ की कार्यशैली को आधुनिक संदर्भों में ढाला।
उनकी वाणी में स्पष्टता है, विचारों में संतुलन है और दृष्टिकोण में समावेशिता है। चाहे जाति व्यवस्था पर खुलकर बोलना हो या फिर भारतीय मुसलमानों के बारे में सकारात्मक दृष्टिकोण रखना — मोहन भागवत जी ने समय-समय पर यह सिद्ध किया है कि संघ केवल परंपराओं का पोषक नहीं, बल्कि आवश्यक सुधारों का संवाहक भी है।
उनकी नेतृत्व क्षमता का ही परिणाम है कि संघ आज केवल एक संगठन नहीं, बल्कि एक राष्ट्रचिंतन का केंद्र बन गया है। सेवा, शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्राम विकास जैसे क्षेत्रों में संघ से जुड़े संगठनों का कार्य आज जन-जन तक पहुंच रहा है।
Editorial : श्राद्ध एक आध्यात्मिक महत्व
आज जब वे अपने जीवन के एक और वर्ष में प्रवेश कर रहे हैं, तो यह अवसर है कि हम उनके विचारों से प्रेरणा लें-संगठन, समर्पण और स्वदेशी दृष्टिकोण को आत्मसात करें।
राष्ट्र निर्माण केवल सरकार का दायित्व नहीं होता, यह हर नागरिक का साझा कर्तव्य है — यही संदेश मोहन भागवत जी के जीवन से मिलता है। हम मोहन भागवत जी को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ देते हैं और उनके दीर्घायु, स्वस्थ एवं प्रेरणास्पद जीवन की कामना करते हैं।



