Editorial : प्रेम-समर्पण और हरियाली का उत्सव

Editorial: A celebration of love, dedication and greenery

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Editorial : भारतवासियों की धरोहर, तीज महोत्सव हरियाली तीज, का महत्व केवल धार्मिक या सांस्कृतिक उत्सव मात्र नहीं है; यह महिला सशक्तिकरण, प्राकृतिक सौंदर्य और पारिवारिक प्रेम का समर्पित उत्सव है। हरियाली तीज सावन मास की शुक्ल तृतीया को मनाई जाती है।

इस दिन माता पार्वती की तपस्विनी साधना और भगवान शिव से मिलन का प्रतीक इस पर्व को और भी अधिक पावन बनाता है। यह व्रत विवाहित महिलाएं पति की लंबी आयु तथा कुंवारी लड़कियां उत्तम वर की कामना से रखती हैं।

जब महिलाएं पारं परंपरागत व्रत रखकर झूले झूलती हैं, लोकगीत गाती हैं और मेहँदी, सिंदूर व गहनों से सज-धज कर परिवार और शिक्षा समुदाय को जोड़ती हैं, ये सब मिलकर सामाजिक संबंधों को मजबूत बनाते हैं। इस उत्सव के माध्यम से पारंपरिक व आधुनिक पीढ़ियों में सांस्कृतिक पहचान विकसित होती है।

इस वर्ष के जयपुर शाही तीज आयोजन में राज्य स्तरीय पर्यटन विभाग ने एक विशेष महिला-केंद्रित हस्तशिल्प एवं सांस्कृतिक मेला का आयोजन किया है। इसमें महिलाएँ उद्यमी, हस्तशिल्पकार और स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर अपनी प्रतिभा और उत्पाद प्रदर्शित करेंगी।

इसी तरह दिल्ली हाट, पितांपुरा में होने वाला आयोजन तकनीकी प्रतिभा के साथ लोक कला को जोड़ते हुए मनोरंजन, स्वास्थ्य कार्यशाला और प्रतियोगिताओं से भरपूर है।

हरियाणा में 28 जुलाई को अंबाला में आयोजित राज्य-स्तरीय तीज समारोह में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने महिलाओं के लिए कई योजनाओं की घोषणा की है जैसे ड्रोन ऑपरेशन प्रशिक्षण, साझा बाज़ारों में स्॥त्र उत्पादों की बिक्री, व ग्रामीण-शहरी मिशनों द्वारा आर्थिक सशक्तिकरण का समर्थन। तीज महोत्सव केवल धार्मिक उत्सव नहीं बल्कि महिलाओं की सामजिक और आर्थिक भूमिका को सशक्त बनाने का माध्यम बनता जा रहा है।

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घेवर जैसी विशेष मिठाइयाँ, हरी सब्जियों से बनी पुलाव, टिंकी जैसे पकवान व आनंद के लिए मेहँदी, रंगोली, और लोक परिधानों का मेल—इन सबका संयोग तीज को एक विविध एवं समृद्ध अनुभव बनाता है तीज महोत्सव नारी शक्ति, प्राकृतिक सौंदर्य, सामाजिक मेलजोल और सांस्कृतिक गौरव का संगम है। इस पर्व के माध्यम से प्रत्येक भारतीय महिला को सम्मान, सामर्थ्य और गर्व की अनुभूति होती है।

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