Editorial : धुल चेहरे पर थी…

Editorial: There was dust on the face...

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Editorial : इंसान कई बार असली समस्या को समझने में भूल करता है। यही बात सत प्रतिशत सरकारों पर भी लागू होती है। समस्या का मूल ढूंढ कर उस का इलाज करने की बजाए ऊपरी सतह पर जो दीखता है उस का इलाज किया जाता है! कई सामाज सेवी संगठन भी यह काम करते हैं। इतना सब कुछ होने के बावजूद इन की बातों या कार्यों का असर बहुत कम देखने को मिलता है।

प्लास्टिक की खोज करने वाले ने कभी सोचा भी नहीं होगा कि उस की खोज जो उसने लोगों की सुविधा के लिए की थी वही एक दिन समाज के लिए दुश्मन बन जाएगी। प्लास्टिक आज के समय में इंसानो और इंसानियत का एक नंबर का दुश्मन बन चूका है ऐसा कई लोग को कहते हम सुनते हैं। कई लोग ऐसे हैं जो इस बात को गलत मानते हैं।

उन का कहना है कि गलती प्लास्टिक या उस के खोज की नहीं है। गलती दर असल हमारी है। हमारी बुरी या गलत आदतों की है। प्लास्टिक आज भी हमारे लिए कई प्रकार से उपयोगी है। हमारे किचन के बर्तनो, खाने की प्लेटों, पानी या जूस पिने के ग्लास, जग, चम्मच, छुरी कांटे इत्यादि हजारों वस्तुएं हैं जिन का हम उपयोग करते हैं।

Editorial : आत्मनिर्भरता की झलक

सब से अधिक उपयोग हम रोज जिस का करते हैं वह प्लास्टिक से बनी शॉपिंग बैग्स का। अब आइए दूसरी ओर। हमारी कहीं भी कूड़ा फेंकने की गन्दी आदत के कारण शायद ही कोई ऐसी जगह हो जहाँ प्लास्टिक की बनी थैलियों से ले कर अन्य इस्तेमाल बाद फेंकी हुई प्लास्टिक की वस्तुएं ना दिखाई दें।

सड़कें, फूटपाथें, बा$गीचे, दरिया किनारे, पिकनिक स्थल, नदियां, नालें और समंदर तक को हमने नहीं छोड़ा हैं। बस या ट्रेन में सफर करते हुए देखिये प्लास्टिक किसी न किसी प्रकार से पड़ा हुआ मिलेगा। प्लास्टिक को ना तो जलाया जा सकता है और न ही इसे जमीन में दबाया जा सकता है।

Editorial : जाति जनगणना का मुख्य उद्देश्य

जलने पर इस में से निकलने वाला धुआं और बदबू भरे गैस से अस्थमा जैसी अनेक बीमारियां होती हैं। एकदम ताजा शोध में वैज्ञानिकों ने साबित कर दिया कि यह जहरीली गैस श्वाश में लेने से कैंसर और टीबी जैसी लाइलाज बीमारियां भी होती है।

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