Editorial : भारत की आर्थिक कूटनीति
Editorial: India's economic diplomacy

Editorial : भारत ट्रंप के टैरिफ की चुनौती के मुकाबले के लिए आर्थिक कूटनीति के साथ आगे बढ़ा है। नि:संदेह भारत दमदार आर्थिकी तैयार करते हुए आगे बढ़ रहा है। ऐसे में सरकार के द्वारा घरेलू अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए कुछ और बातों पर ध्यान दिया जाना लाभप्रद होगा।
भारत के पास दुनिया का कूटनीतिक समर्थन है और इन सबके साथ-साथ भारत की आर्थिकी दमदार और मजबूत है। इन आधारों पर भारत पाकिस्तान से सभी प्रकार के युद्ध में विजेता बनते हुए दिखाई दे सकेगा। वस्तुत: इस समय जहां पूरा देश पाकिस्तान के साथ युद्ध सहित सभी विकल्पों से मुकाबले के लिए सरकार के साथ एकजुट खड़ा है, वहीं देश की मजबूत घरेलू आर्थिकी भी भारत के लिए एक प्रभावी हथियार दिखाई दे रही है।
भारत अपने मजबूत स्थानीय और घरेलू बाजार से किसी भी आर्थिक झटके का सामना करते हुए आगे बढऩे की संभावना रखता है। इस समय छह महत्वपूर्ण आधार भारत की घरेलू आर्थिकी को मजबूती देते हुए दिखाई दे रहे हैं। इनमें घटती महंगाई, घटती ब्याज दर, अच्छा मानसून, बढ़ता शेयर बाजार, मध्यम वर्ग की बढ़ती क्रयशक्ति और ट्रंप के टैरिफ से मुकाबला करने की भारत की कूटनीतिक रणनीति शामिल है।
भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियादी स्थिति मजबूत है। निवेशकों का विश्वास बना हुआ है। अर्थव्यवस्था व्यापक आर्थिक विवेक से प्रबंधित की जा रही है। उद्यमियों को नीतिगत स्थिरता, प्रशासन, नवाचार एवं वृहद आर्थिक नीति उपलब्ध कराई जा रही है।
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उल्लेखनीय है कि हाल ही में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सैन फ्रांसिस्को में भारतीय प्रवासियों को संबोधित करते हुए कहा कि भारत की घरेलू अर्थव्यवस्था लगातार मजबूत बनाई जा रही है और सरकारी ऋण के बेहतर प्रबंधन से भारत का राजकोषीय घाटा भी नियंत्रित है।
साथ ही अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और विश्व बैंक का मानना है कि भारत चुनौतियों के बीच नई संभावनाओं वाला देश है और भारत वैश्विक व्यापार को बढ़ाने वाला इंजन बन सकता है। सरकार के पूंजीगत खर्च बढऩे से भी अर्थव्यवस्था को बल मिल रहा है। देश के कोने-कोने में घरेलू बाजार को मेक इन इंडिया अभियान से शक्ति मिल रही है।
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लंबे समय तक दूसरे देशों से बड़ी संख्या में आयातित कई औद्योगिक उत्पाद देश में ही बनाए जा रहे हैं। लगातार स्थानीय उत्पादों के उपयोग और स्थानीय श्रम को अच्छे मूल्य पर जोर दिए जाने जैसे अभियान से शहरों से गांवों तक स्वदेशी सामान की खरीदी में जोरदार उछाल आया है।



