Editorial : साइबर सुरक्षा
Editorial : Cyber Security

Editorial : वैश्विक स्तर पर साइबर हमले तीव्र दर से बढ़ रहा है लगभग हर दिन 2,200 से ज़्यादा हमले हो रहे हैं यानि 39 सेकंड में एक हमला। रिस्कबेस्ड सिक्योरिटी की एक रिपोर्ट से सन् 2019 के पहले नौ महीनों में डेटा उल्लंघनों के कारण 7.9 बिलियन रिकॉर्ड उजागर हुए थे।
साइबर खतरे के बढ़ने के साथ, साइबर सुरक्षा समाधानों पर वैश्विक खर्च बढ़ रहा है जो 2026 तक वैश्विक स्तर पर 260 बिलियन डॉलर तक पहुंच जाएगा। साइबर अपराध व्यक्ति या संगठन द्वारा किया जाता है। कुछ साइबर अपराधी उन्नत तकनीकों का उपयोग करते हैं और तकनीकी रूप से कुशल होते हैं।
साइबर अपराधी सिर्फ कंप्यूटर सिस्टम और नेटवर्क में सेंध नहीं लगाते हैं कभी कभी वे मानव मस्तिष्क को भी हैक कर लेते हैं । यह साइबर अपराधियों के लिए संभावित इनाम है जो उन्हें अवैध गतिविधियों में संलग्न होने के लिए आकर्षित करता है। नेटवर्क का उपयोग करने वाले सभी व्यवसाय कॉर्पोरेट जासूसी या ग्राहक हमलों के लिए लक्ष्य होते हैं।
साइबर सुरक्षा में उन व्यक्तियों की ही सेवा ली जानी चाहिए जिनकी इस क्षेत्र में कार्य करने की रुचि हो। मनोवैज्ञानिक साइबर सुरक्षा पेशेवर को ऐसे हमलों को रोकने के लिए सुरक्षा उपाय बनाने में सहयोग कर सकते हैं ।
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मनोवैज्ञानिकों की भूमिका जो लोग साइबर क्राइम के लिए जोखिम में हैं उनके बचाव के लिए उन्हें मानसिक रूप से तैयार करने में सहायता प्रदान करना है क्योंकि साइबर अपराधी व्यक्ति के संवेग का उपयोग करता है जब व्यक्ति उच्च संवेग की स्थिति में होता है तो संज्ञानात्मक क्षमताओं जैसे निर्णय लेने की क्षमता, प्रत्यक्षीकरण, चिंतन व अन्य का ठीक से उपयोग नहीं कर पाता है।
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मनोविज्ञान के नियम एवं सिद्धांतों का उपयोग साइबर अपराधियों के व्यवहार व कारणों को समझने, साइबर सुरक्षा में संलग्न पेशेवरों को ट्रेनिंग एवं प्रोत्साहन, साइबर सुरक्षा के लिए लोगों में जागरूकता लाने तथा साइबर अपराध से पीड़ित व्यक्तियों में होने वाले मानसिक एवं मनोवैज्ञानिक समस्याओं के प्रबंधन तथा भविष्य के लिए सतर्क बनाने हेतु किया जाता है।



