Editorial : मेडिकल माफिया

Editorial: Medical Mafia

Editorial: Medical Mafia
Editorial: Medical Mafia

Editorial : भारत में स्वास्थ्य सेवा का एक बड़ा हिस्सा निजी अस्पतालों के हाथों में है, और यह एक गंभीर समस्या बन चुकी है। स्वास्थ्य सेवाएं देने का दायित्व सरकार का है, लेकिन उचित संख्या में सरकारी अस्पतालों की कमी के कारण निजी अस्पतालों की बाढ़ सी आ गई है।

इन अस्पतालों का इलाज करने का तरीका अब किसी से छिपा नहीं है। मरीजों और उनके परिवार वालों को अनाप-शनाप बिलों के रूप में लूटा जा रहा है, जिसमें कमरे का किराया, बेड, दवाइयाँ, सर्जरी चार्जेस, ग्लूकोज की फीस, और डॉक्टर के चार्जेस शामिल हैं।

यह स्थिति तब और गंभीर हो जाती है जब अस्पतालों के द्वारा मरीजों को उनके रिश्तेदारों को उनकी दवाइयाँ अस्पताल से ही खरीदने के लिए मजबूर किया जाता है, जबकि वे दवाइयाँ बाजार में सस्ती मिलती हैं। इन दवाइयों के महंगे दामों को लेकर कई शिकायतें मीडिया में सामने आई हैं, लेकिन सरकार ने इस पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया है।

भारत की सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से कहा था कि वह इस मुद्दे पर एक गाइडलाइन जारी करे और अस्पतालों को मरीजों के रिश्तेदारों को दवाइयाँ खरीदने के लिए स्वतंत्र छोड़ने का निर्देश दे। साथ ही, अस्पतालों द्वारा ली जाने वाली सेवाओं की कीमतों की एक सूची उन अस्पतालों के मुख्य द्वार और कैश काउंटर पर प्रदर्शित की जानी चाहिए।

अगर ऐसा हो, तो मरीजों और उनके परिवार वालों को ज्यादा परेशानी नहीं होती। इसके अलावा, अस्पतालों को यह भी निर्देश दिया जाना चाहिए कि अगर किसी मरीज की इलाज के दौरान मृत्यु हो जाती है, तो उस मरीज का बिल माफ कर दिया जाए।

स्वास्थ्य क्षेत्र में इस तरह की क्रूरता की मिसाल देने वाले मामलों में हम सभी को यह समझने की आवश्यकता है कि मानवता का कोई मूल्य नहीं रह गया है। मेडिकल माफिया का यह बढ़ता हुआ प्रभाव भारत की छवि को भी खराब कर रहा है।

Read Also : Editorial : सुनीता विलियम्स युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत

अगर इलाज के दौरान कोई व्यक्ति मर जाए, तो भी उसे अपनी मृत्यु का बिल चुकाना पड़ता है। यह एक अमानवीय स्थिति है। इस स्थिति को बदलने की जिम्मेदारी सरकार की है, लेकिन सवाल यह है कि सरकार इस पर चुप क्यों है? क्यों वह इस समस्या को हल करने के लिए कोई सख्त कदम नहीं उठा रही है?

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button