Editorial: नववर्ष की परम्पराएं
Editorial: New Year traditions

दुनिया भर में नव वर्ष का स्वागत बड़ी धूमधाम, उमंग और उल्लास के साथ किया जाता है। अनेक देशों में नववर्ष से जुड़ी अपनी-अपनी परम्पराएं हैं। हमारे देश के विभिन्न प्रांतों में भी नववर्ष का स्वागत अलग-अलग तरीके से किया जाता है। हमारे यहां ईस्वी संवत् और विक्रमी संवत् दोनों को ही महत्व दिया जाता है। ईस्वी संवत् के अनुसार नव वर्ष की शुरूआत एक जनवरी को और विक्रमी संवत् के अनुसार नए साल की शुरूआत वैशाख माह के प्रथम दिन से मानी जाती है जबकि इस्लाम में हिजरी संवत् के आधार पर नववर्ष की शुरूआत मानी जाती है। देश के विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग तरीके से नववर्ष मनाया जाता है जैस बिहार में नव वर्ष पर सरस्वती की पूजा की जाती है। जम्मू कश्मीर में नव वर्ष के उपलक्ष्य पर अनाथ बच्चों को भरपेट भोजन कराकर नए कपड़े पहनाए जाते हैं और उनके माथे पर तिलक लगाकर आरती उतारी जाती है। असम में नव वर्ष पर घर के आंगन में रंगोली सजाए जाते हैं तथा दीप या मोमबत्तियां जलाई जाती हैं। छत्तीसगढ़ में लोग गीत गाकर नव वर्ष का स्वागत करते हैं। राज्य के कुछ आदिवासी इलाकों में फसल में महुआ के फूल दिखाई देने पर आदिवासी उत्सव मनाया जाता है, जो उनके नव वर्ष का प्रारंभ माना जाता है। महाराष्ट्र में नव वर्ष पर एक सप्ताह पहले ही घरों की छतों पर रेशमी पताका फहराई जाती है। घरों व दफ्तरों को रंग-बिरंगे फूलों से सजाया जाता है तथा इस दिन पतंगें उड़ाकर नव वर्ष मनाया जाता है। राजस्थान में नव वर्ष के विशेष अवसर पर गुड़ से बने पकवान खाना बहुत शुभ माना जाता है। केरल में नव वर्ष पर नीम व तुलसी की पत्तियां तथा गुड़ खाना शुभ माना जाता है। पंजाब तथा हरियाणा में एक जनवरी को ही नववर्ष धूमधाम से मनाया जाता है किन्तु यहां नई फसल का स्वागत करते हुए नववर्ष वैसाखी के रूप में भी मनाया जाता है।



