Editorial : मानवता की सेवा ही परम धर्म
Editorial: Service to humanity is the ultimate religion

Editorial: भारतीय संस्कृति में गुरु नानकदेव एक महान पवित्र आत्मा और ईश्वर के सच्चे प्रतिनिधि थेे। गुरु नानक जयंती का पर्व सभी लोग श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाते हैं। इस दिन सिख समुदाय के लोग गुरुद्वारों में नगर कीर्तन निकालते हैं और सुबह-सुबह प्रभातफेरी निकाली जाती है।
गुरु नानक जी सिखों के 10 गुरुओं की श्रृंखला में प्रथम हैं। साल 2024 में गुरु नानक जयंती का पर्व 15 नवंबर को मनाया जाएगा। सिख धर्म ने दुनिया को यह संदेश दिया है कि मानवता की सेवा ही परम धर्म है। बाल दिवस पर भाषण। गुरु नानक देव की शिक्षाएं आज अधिक प्रासंगिक हैं क्योंकि उन्होंने मानवता और सत्कर्म को सबसे बड़ा धर्म बताया था। उन्होंने समाज में कई बदलाव लाने का काम किया, उन्होंने स्त्रियों को पुरुषों के साथ बराबरी का दर्जा दिया और वैवाहिक जीवन को पवित्र माना।
उन्होंने कहा कि विद्यालय में सभी धर्म, जाति, और सम्प्रदाय के लोगों को समान रूप से शिक्षा दी जानी चाहिए। नानक के बचपन में ही अनेक अद्भुत घटनाएँ घटित हुईं जिनसे लोगों ने समझ लिया कि नानक एक असाधरण बालक है। कहते हैं कि नानकदेवजी से ही हिंदुस्तान को पहली बार हिंदुस्तान नाम मिला। लगभग 1526 में जब बाबर द्वारा देश पर हमला करने के बाद गुरु नानकदेवजी ने कुछ शब्द कहे थे तो उन शब्दों में पहली बार हिंदुस्तान शब्द का उच्चारण हुआ था- खुरासान खसमाना कीआ हिंदुस्तान डराईआ।
गुरुनानक देव जी ने न केवल शिक्षाएं दीं, बल्कि स्वयं भी इसका पालन किया। उन्होंने करतारपुर साहिब में बिताए अपने जीवन के आखिरी 18 वर्षों में खेतों में हल चला कर यह बताया कि हर इंसान को अपने जीवन में मेहनत करनी चाहिए। एक अन्य रोचक घटना में उनके पिता ने उन्हें गृहस्थ आश्रम की ओर ध्यानाकर्षित करने के लिए तत्कालीन नबाव लोदी खाँ के यहाँ नौकरी दिलवा दी।



